कुरुक्षेत्र। गीता बच्चों को कर्म करने, परिणाम की चिंता न करने और सभी के साथ सम्मान और दया का व्यवहार करने का उपदेश देती है। इसके अतिरिक्त यह आत्म नियंत्रण, धैर्य, आंतरिक शांति और साहस विकसित करने के महत्व पर जोर देती है, ताकि बच्चे अपने जीवन की चुनौतियों का सामना कर सके। यह विचार अंतरराष्ट्रीय श्रीमद्भागवत गीता जयंती समारोह के उपलक्ष्य में मातृभूमि सेवा मिशन की ओर से आयोजित अठारह दिवसीय कार्यक्रम के द्वितीय दिवस मिशन के संस्थापक डाॅ. श्रीप्रकाश मिश्र ने मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा बाल दिवस के अवसर पर आयोजित गीता बाल संवाद कार्यक्रम में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश जीवन के संघर्षों से लड़ने की शक्ति देते हैं। इसलिए बच्चों को गीता के ज्ञान के संदेश को सिखाना बहुत महत्वपूर्ण होता है और प्रत्येक माता पिता का यह कर्तव्य बनता है कि वह अपने बच्चे को भगवद्गीता जैसे महान ग्रंथ को पढ़ाएं और उसे अपने जीवन में उतारने की सीख दें। कार्यक्रम में बतौर अति विशिष्ट अतिथि उपस्थित समाजसेवी हरीश कुमार को मातृभूमि सेवा मिशन परिवार की ओर ही अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। संवाद