संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। भट्ठे पर काम करने वाले गरीब और असहाय लोगों के बच्चों को मिट्टी में खेलते देख मन दुखी हुआ तो बच्चों के लिए कुछ करने की ठानी और बच्चों को शिक्षा की दिक्कत न हो इसके लिए चेतना संस्था का निर्माण किया। संस्था के शुरुआती दौर में आठ के करीब लोग संस्था से जुड़े धीरे-धीरे कारवां बढ़ा, जो कि वर्तमान में 22 के करीब पहुंचा।
इस संस्था का गठन केयू की शिक्षक स्वर्गीय डॉ. शारदा कुमारी ने वर्ष 1990 में किया था। संस्था से जुड़े शिक्षकों ने शुरू में बच्चों को पेड़ों के नीचे पढ़ाया, धीरे-धीरे समय बदला और केयू के शिक्षकों ने एक भवन का निर्माण भट्ठा कालोनी में वर्ष 1998 में कराया, जिसे वर्ष 2002 में भव्य रूप दिया गया।
पिछले 30 वर्षों से समाज में जनकल्याण के कार्य कर रही इस संस्था में 160 के करीब बच्चे अपने सपनों को पूरा करने की तैयारी में लगे हुए हैं और इसके अलावा 22 विद्यार्थी ऐसे है जो कि विभिन्न कॉलेजों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और पार्ट समय में संस्था में आकर शिक्षा ग्रहण करते हैं। संस्था से जुड़े पदाधिकारियों ने अपने विचारों को अमर उजाला फाउंडेशन के साथ सांझा किया हैं।
संस्था का गठन 30 वर्ष पहले हुआ
संस्था की प्रधान प्रोमिला खेतरपाल का कहना है कि संस्था का निर्माण करीब 30 वर्ष पहले किया गया था, इस संस्था के माध्यम से जरूरतमंद गरीब बच्चों को शिक्षा ग्रहण कराई जाती है, जिसके लिए गरीब बच्चों को, जो कि अन्य होटलों पर कार्य करते हैं, उन्हें शिक्षा के प्रति जागरूक करते हुए शिक्षा फ्री में शिक्षा दिलाई जाती हैं।
शुरुआत में पेड़ों के नीचे पढ़े बच्चे
संस्था की फाउंडर इंदिरा हांडा ने बताया कि संस्था के निर्माण के समय बच्चों को पेड़ों के नीचे छांव में पढ़ाया जाता था और फिर धीरे-धीरे केयू के शिक्षकों और आस-पास के लोगों के सहयोग से संस्था के भवन बनाया गया। जिसमें वर्तमान में 160 के करीब बच्चे अपने फ्री समय में यहां पढ़ने आते हैं।
फ्री कराया जाता है मेडिकल चेकअप
संस्था की कोषाध्यक्ष डॉ. अनिता दुआ ने बताया कि संस्था का उद्देश्य है कि कोई भी जरूरतमंद विद्यार्थी बिना पढ़ाई के न रहे, इसलिए सभी जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाई के प्रति जागरूक करते हुए फ्री में शिक्षा उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अलावा प्रतिवर्ष बच्चों का मेडिकल चेकअप भी संस्था की ओर से फ्री कराया जाता हैं।
विद्यार्थियों को बांटी जाती हैं पुस्तकें
संस्था की सचिव गीता जायसवाल का कहना है कि संस्था की ओर से जरूरतमंद विद्यार्थियों को पुस्तकें, वर्दी के साथ-साथ अन्य वस्तुएं उपलब्ध कराई जाती है, जिससे कि उनको पढ़ने में किसी भी दिक्कत का सामना न करना पड़े। इसके अलावा बच्चों का एक भ्रमण भी संस्था की ओर से कराया जाता है, ताकि बच्चों की पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ सके।