कुरुक्षेत्र। बठिंडा के महाराजा रणजीत सिंह विश्वविद्यालय के सभागार में नाटक पार्क का मंचन करते ह
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कुरुक्षेत्र। किसी को जब उसके घर या स्थान से निकाल कर दूसरी जगह फेंक दिया जाता है। तो वह कभी भी उसे अपनी जगह के रूप में स्वीकार नहीं कर पाते। वो, उनकी पुश्तें पूरी जिंदगी इंतजार करती हैं, कि एक दिन सब कुछ ठीक हो जाएगा और उन्हें वापिस बुला कर उनकी जगह दे दी जाएगी, पर ऐसा कभी होता नहीं। विस्थापन का दर्द जो झेलता है, वहीं उस दर्द की पीड़ा को समझता है। इस तरह की गंभीर समस्याओं को एक पार्क की तीन बेंचों के माध्यम से कलासाधक मंच के कलाकारों ने प्रस्तुत किया।
मौका था बठिंडा के महाराजा रणजीत सिंह विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित 15 दिवसीय नाट्यम फेस्ट के छठे दिन का, जहां हरियाणा कला परिषद की ओर से नाटक पार्क का मंचन हुआ। कीर्ति कृपाल सिंह द्वारा आयोजित 11वें नाट्यम उत्सव में डॉ. गगन थापा, निदेशक युवा कल्याण विभाग, पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला, डा. अनुज बंसल, अनुराधा भाटिया व डा. कशिश अतिथि के रुप में उपस्थित रहे। फिल्म अभिनेता मानव कौल के लिखे, रंगकर्मी गौरव दीपक जांगडा के निर्देशन तथा विकास शर्मा के सह-निर्देशन में तैयार नाटक पार्क ने विभिन्न मुद्दों पर प्रकाश डाला।
नाटक तीन अन्जान लोगों की बातचीत पर आधारित रहा। नाटक एक विशेष जगह के स्वामित्व की लड़ाई से प्रारंभ होकर उन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों की ओर पहुंचाता है, जिसकी चर्चा करने के लिए जनसामान्य के मन में कौतुहल रहता है। पात्रों की बातचीत के जरिए देश में व्याप्त नक्सलवाद और आदिवासियों के विस्थापन जैसे कई मुद्दों को भी रेखांकित किया गया है।