संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। प्राचीन शक्तिपीठ मां भद्रकाली मंदिर में गुप्त नवरात्रि के उपलक्ष्य में चल रहे श्री चंडी यज्ञ का समापन रविवार को हुआ। यह श्री चंडी यज्ञ छह जुलाई से चला था। श्री चंडी महायज्ञ के साथ-साथ श्री दुर्गा सप्तशती और श्री दुर्गा कवच का पाठ भी मंदिर में किया। इस हवन के लिए मंदिर परिसर में 51 ब्राह्मण देशभर से पहुंचे।
शास्त्रों के अनुसार धार्मिक और ऐतिहासिक कथाओं में भी विजय और शक्ति प्राप्ति के लिए चंडी पाठ का उल्लेख मिलता है। भगवान श्री राम ने भी चंडी पाठ देवी स्तुति के रूप में किया था। मंदिर परिसर में हवन यज्ञ के दौरान सभी देवी-देवताओं का आह्वान कर जौ, नारियल, गुग्गुल, मखाना, काजू, किशमिश, छुहारा, मूंगफली, बेलपत्र, शहद, घी, सुगंध, अक्षत, शहद , घी की आहुति दी गई ।
मंदिर के पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा ने बताया कि हवन यज्ञ हमारे सनातन धर्म द्वारा दिया गया ऐसा धार्मिक क्रिया कलाप है, जिसका सिर्फ आध्यात्मिक महत्व ही नही, अपितु चिकित्सीय व प्राकृतिक लाभ भी हैं। वहीं श्री चंडी यज्ञ बहुत ही प्रभावशाली, शक्तिशाली व जीवित प्रक्रिया है। पौराणिक काल में ऋषि मुनि, देवता गण अपार शक्ति प्राप्ति के लिए यह यज्ञ किया करते थे । शास्त्रानुसार चंडी यज्ञ के आयोजन से सौभाग्य में वृद्धि होती हैं और कार्यक्षेत्र में आने वाली बाधाएं खत्म हो जाती हैं। हवन और पाठ के यजमान घरौंडा के पूर्व विधायक नरेंद्र सांगवान रहे। इस मौके पर शिमला देवी, एमके मौदगिल, जीवन मौदगिल, मीना जोशी, डॉ. अन्नू पॉल शर्मा, स्नेहिल शर्मा, देवेंद्र गर्ग, आशीष सहित अन्य मौजूद रहे।