आस्था.....शनिचरी अमावस्या पर कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर में स्नान करते श्रद्धालु। इस मौके पर सन्?
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कुरुक्षेत्र। शनिचरी अमावस्या पर सन्निहित सरोवर, ब्रह्मसरोवर और पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। तीर्थ में स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने अपने पितरों के अक्षय मोक्ष के लिए पिंडदान, गति कर्म व पूजा अर्चना का कार्य किया। अमावस की पूर्व संध्या पर ही श्रद्धालु तीर्थ पर जुटने शुरू हो गए। सूर्योदय के साथ ही श्रद्धालुओं ने पवित्र तीर्थ में स्नान किया और पूजन कर पूर्वजों की आत्मिक शांति की कामना की।
सरस्वती तीर्थ पर श्रद्धालुओं ने प्रसिद्ध प्रेत पीपल पर सूत भी बांधा। वहीं पितरों की तृप्ति के लिए जल अर्पण किया। श्रद्धालुओं ने कार्तिकेय मंदिर में पिंडी स्वरूप में विराजमान कार्तिकेय जी का तेलाभिषेक भी किया। मंदिर में तेल अर्पित करने के लिए श्रद्धालुओं को लंबा इंतजार करना पड़ा, क्योंकि इसके लिए एक लंबी लाइन लगी हुई थी।
अखिल भारतीय श्री मार्कंडेश्वर जनसेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत जगन्नाथ पुरी ने बताया कि पितृ दोष पीढ़ी दर पीढ़ी कष्ट पहुंचाता है। इस दोष के निवारण के लिए कुछ विशेष दिन और समय तय हैं जिनमें इसका पूर्ण निवारण होता है। पितृदोष से मुक्ति के लिए अमावस्या अच्छा अवसर होता है।