संवाद न्यूज एजेंसी
शाहाबाद। गांव धंतौड़ी के हर जन की आंखें उस समय नम हो गईं, जब बाप-बेटा और बेटी की चिताएं एक साथ जलीं। नरदेव सिंह ने जब अपने भाई जसविंद्र सिंह, भतीजे समर और भतीजी तान्या की चिता को मुखाग्नि दी तो सभी का कलेजा मुंह को आ गया। नरदेव स्वयं फफक-फफक कर रो पड़ा, क्योंकि उसके भाई का पूरा परिवार इस हादसे में खत्म हो गया था। वहां मौजूद हर कोई कुदरत के इस कहर को कोसता नजर आ रहा था। रोते हुए एक वृद्ध व्यक्ति की जुबां पर बार-बार एक ही लाइन आ रही थी..ओह रब्बा इह की कहर बरपाया..प्यो..धीह...ते..पुत्र नूं कठे ही मार मुकाया। हादसे के बाद शुक्रवार को पूरे गांव धंतौड़ी में मातम पसरा रहा और किसी घर में चूल्हा तक नहीं जला।
जसविंद्र सिंह राज मिस्त्री का काम करता था और आर्थिक तंगी के बावजूद अपने परिवार के साथ खुश था। जसविंद्र और नरदेव दोनों भाई एक ही मकान में रहते थे, जबकि तीसरा भाई उसी गली में रहता है। वीरवार को भाई जसविंद्र, समर, तान्या व भतीजा कीरत बाइक पर सवार होकर शाहाबाद पहुंचे और मारकंडा नदी में गणेश विसर्जन के बाद घर लौट रहे थे। गणेश उत्सव को लेकर सभी में काफी उत्साह था। सातवीं कक्षा के समर ने स्कूल में प्रैक्टिकल के दौरान गणेश के बाल रूप को अपने हाथों से सजाया था, लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। तभी रास्ते में गांव शरीफगढ़ जीटी रोड पर ट्रक की टक्कर से बाप-बेटे और बेटी की मौत हो गई, जबकि बाइक पर सवार आठ वर्षीय कीरत की जान बच गई। हादसे के बाद कीरत इस कदर भयभीत है कि बार-बार वह डर के अपनी मां की गोद में छिप जाता है।
पति तो कभी बच्चों के शव से लिपटकर बेहोश हो रही थी मनजीत
सड़क हादसे में पति और बच्चों की मौत के बाद पत्नी मनजीत शवों से लिपट कर बार-बार मूर्छित हो रही थी। वह कभी पति तो कभी बच्चों के शव देखकर बेहोश हो रही थी। साथ ही अपने ही बालों को खींच कर अपने भाग्य को कोस रही थी। परिजन और अन्य लोग उसे ढांढस बंधाने में लगे थे।
मार्ग पर खिसकी मिट्टी बन रही हादसों का सबब
शाहाबाद से धंतौड़ी तक पुल पर कई जगहों पर मिट्टी खिसकी हुई है। पुल की यह दशा हादसों को न्योता दे रही है। वीरवार को भी पुल पर मरम्मत का काम चल रहा था। शरीफगढ़ के सामने भी खस्ताहाल पुल के हिस्से पर बैरिकेड लगाए गए हैं। ग्रामीण बार-बार पुल की मरम्मत करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार बेपरवाह हैं। माना जा रहा है कि जीटी रोड पर शरीफगढ़ के पास हुए हादसे का कारण खस्ताहाल मार्ग भी है।