फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kurukshetra News: अब धर्मनगरी पर केंद्रित रहेगी प्रदेश की राजनीति

विज्ञापन
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र महाभारत व गीता के साथ-साथ अब सियासत की धरती भी बन गई है, जो चंडीगढ़ के बाद प्रदेश की राजनीतिक का केंद्र बिंदु होगी। पहले सांसद फिर प्रदेशाध्यक्ष और अब नायब सिंह सैनी के मुख्यमंत्री बनते ही इस क्षेत्र को खास सियासत की दृष्टि से देखा जाने लगा है।
विज्ञापन

यह पहला मौका है जब धर्मनगरी से मुख्यमंत्री की कमान सौंपी गई है और अब यही मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय होगा। ऐसे में लोकसभा चुनावों के बन चुके माहौल में दूसरे राजनीतिक दलों के भी समीकरण बिगाड़ दिए हैं। हालांकि यह क्षेत्र पहले भी राजनीतिक का गढ़ रहा है, जिससे सत्तासीन पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष से लेकर विधानसभा अध्यक्ष एवं मंत्री तथा एक साथ तीन-तीन सांसद भी दिए हैं। कुछ दिनों बाद ही होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए भी यह क्षेत्र बड़ा अखाड़ा बनने लगा था, लेकिन अब इस पर सभी राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ आम लोगों की नजरें भी टिक गई हैं।
25 जनवरी 1970 को अंबाला जिले के गांव मिर्जापुर माजरा में जन्मे नायब सैनी पहले से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे, जिसके चलते ही वे राजनीति में भी उतरे। उन्होंने भले ही पहले अपने क्षेत्र नारायणगढ़ में सियासी पारी शुरू की लेकिन सांसद बनने के बाद कुरुक्षेत्र को भी अपनी कर्मभूमि बनाया। इससे पहले राजनीतिक सफर भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी के रूप में साल 1996 से शुरू किया और साथ मिलकर साल 2000 तक काम किया। इसके बाद वर्ष 2002 में युवा मोर्चा भारतीय जनता पार्टी अंबाला से वह जिला महामंत्री रहे। वह वर्ष 2005 में युवा मोर्चा भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष पद पर भी तैनात रहे। नायब सिंह 2009 में भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा हरियाणा के प्रदेश महामंत्री के पद पर भी आसीन रहे।
विज्ञापन




2019 में कुरुक्षेत्र को बनाया कर्मभूमि, सांसद, प्रदेशाध्यक्ष और अब मुख्यमंत्री बने
नायब सैनी ने वर्ष 2019 में कुरुक्षेत्र को अपनी कर्मभूमि बनाया, जहां सांसद के तौर पर 23 मई 2019 को पदभार ग्रहण किया था। इस चुनाव में उन्हें छह लाख 86 हजार 588 वोट मिले थे, जो 55.98 फीसदी थे। उन्हें 27 अक्तूबर को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष की कमान सौंपी गई थी और अब करीब साढ़े चार माह बाद ही मुख्यमंत्री पद तक पहुंच गए। उन्हें मुख्यमंत्री मनोहर लाल का खास माना जाता रहा है। इससे पहले नायब सैनी ने 2009 में अंबाला के नारायणगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा था लेकिन करीब तीन हजार 28 वोटों के अंतर से वे रामकिशन गुर्जर से हार गए थे। 2014 में उन्होंने 24,361 वोटों से इसी क्षेत्र से चुनाव जीता था, जिसके बाद वे प्रदेश सरकार में 24 जुलाई 2015 से तीन जून 2019 तक राज्यमंत्री भी रहे। उन्होंने प्रदेश में श्रम एवं रोजगार मंत्री स्वतंत्र प्रभार के अलावा खान एवं भू विज्ञान मंत्री व नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के तौर पर भी कार्यभार संभाला।
उधर, आम आदमी पार्टी की प्रदेश की सियासत भी अगले कुछ दिनों बाद होने वाली कुरुक्षेत्र की सियासी महाभारत पर अटकी है। इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनी आप ने पूरे प्रदेश में केवल यही एकमात्र सीट ली है, जिस पर आप ने प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता को मैदान में उतारा है। आप इसी क्षेत्र में लोस चुनाव जीत की उम्मीद के साथ प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य को अगले विधानसभा चुनावों में बदलने की रणनीति बना चुकी है।



सैनी समाज से बन चुके छह बार सांसद तो विधायक से कैबिनेट मंत्री
नायब सैनी को मुख्यमंत्री बनाए जाने से कुरुक्षेत्र लोकसभा में एक बार फिर सैनी समाज का वर्चस्व बढ़ा है। जहां अभी तक इस समाज से छह सांसद रह चुके हैं तो विधायक से लेकर प्रदेश कैबिनेट में मंत्री भी इस समाज से जुड़े नेता रह चुके हैं। 1980 में नारनौल के रहने वाले मनोहर लाल सैनी सांसद बने थे, जिन्हें चौधरी देवीलाल ने जनता पार्टी सेकुलर के टिकट पर यहां मैदान में उतारा था। 1989 में जनता दल से गुरदयाल सिंह सैनी जीते थे, जो उस समय करनाल जिला के गांव कैंथला खुर्द के थे। वर्ष 2014 में राजकुमार सैनी व 2019 में नायब सैनी सांसद बने। ये दोनों ही अंबाला जिला के मूल निवासी रहे हैं। क्षेत्र से एकमात्र गांव प्रतापगढ़ की रहने वाली प्रो. कैलाशो सैनी 1998 तथा 1999 में सांसद बनी थी। उधर, इसी समाज से डॉ. पवन सैनी लाडवा के विधायक रह चुके हैं तो वहीं पिहोवा से विधायक बने बलबीर सैनी प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें