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Kurukshetra News: अब पीवी पैनल की उम्र होगी दोगुना, जल्द खराब नहीं होंगे सोलर सेल

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कुरुक्षेत्र। पीवी पैनल के पीछे कुल्हड़ लगाकर तैयार की गई तकनीक। संवाद
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कुरुक्षेत्र। अब पीवी (फोटोवोल्टिक) पैनल की उम्र दोगुना होगी, जिससे सोलर सेल भी खराब नहीं होंगे। सौर सेल के तापमान की बढ़ती सौर ऊर्जा पैनल की ऊर्जा क्षमता और आयु को कम करती है, जिसके तापमान को कम करने के लिए ही शोध किया गया है, ताकि यह ज्यादा मात्रा में ऊर्जा का उत्पादन करने के साथ लंबे समय तक कार्य कर सके। यह तकनीक दैनिक ऊर्जा उत्पादन को 10 प्रतिशत तक बढ़ाने के साथ-साथ सौर सेल के तापमान को भी 20 डिग्री सेल्सियस तक कम करेगी। यह हॉटस्पॉट को रोकेगी और सौर सेल की आयु को दोगुना करेगी।
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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र के मैकेनिकल विभाग के प्रो. चंद्रशेखर एम द्वारा यह शोध किया गया है। हाल ही में इस शोध पर पेटेंट के लिए भी आवेदन किया गया है, जिस पर सकारात्मक परिणाम मिलने से संस्थान परिसर में खुशी की लहर है। पीवी पैनल के तापमान को कम करने के लिए पैनल के पीछे मिट्टी के बने कुल्हड़, प्लेट तथा डेसिकेंट को लगाया जाएगा, जिसमें पानी भरा जाएगा और वह पानी पैनल के तापमान को कम करने में सहायक होगा, जिससे पैनल ठंडा रहेगा और लंबे समय तक कार्य करने के साथ ऊर्जा उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी।









तीन रुपये प्रति वाट लागत, पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा का होगा स्रोत : प्रो. चंद्रशेखर

प्रो. चंद्रशेखर एम का कहना है कि इस तकनीक की लागत तीन रुपये प्रति वाट रहेगी। भले ही यह लागत सामान्य पीवी पैनल की तर्ज पर होगी, लेकिन इस पैनल की आयु दोगुना होगी, जिससे यह लागत भी सामान्यत: कम होगी। यह पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा का स्रोत होगा, जिससे सौर कोशिकाओं की दक्षता, जीवनकाल, स्थायित्व और विश्वसनीयता में सुधार होता है। इसी के साथ ग्रीष्मकालीन शुष्क जलवायु और तटीय क्षेत्रों जैसी उच्च आर्द्र जलवायु में दक्षता और भी बढ़ जाती है।
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ग्रामीणों के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

पीवी पैनल के तापमान को कम करने के लिए प्रयोग में लाने के लिए मिट्टी से बने कुल्हड़ व प्लेट का प्रयोग में लाया गया है। अगर इस तकनीक को प्रयोग में लाया जाता है तो कुम्हारों सहित ग्रामीण प्रवेश के लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।




सात पेटेंट हो चुके प्राप्त
प्रो. चंद्रशेखर एम को सात पेटेंट प्राप्त हो चुके है और अन्य विषयों पर शोध के क्षेत्र में कार्य का रहे हैं। उनके 18 जर्नल पेपर और 22 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन पत्र भी प्रकाशित हो चुके हैं।

कुरुक्षेत्र। पीवी पैनल के पीछे कुल्हड़ लगाकर तैयार की गई तकनीक। संवाद

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