कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी के ताइक्वांडो के खिलाड़ियों की किक का कायल प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरा देश है। अब खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने को बेताब है। पिछले महीने ही हरियाणा ताइक्वांडो एसोसिएशन की ओर से कुरुक्षेत्र की जाट धर्मशाला में हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता की ओवरऑल ट्रॉफी को अपने नाम किया था। इस प्रतियोगिता में जिले के खिलाड़ियों ने 19 स्वर्ण, 24 रजत और 22 कांस्य पदकों पर कब्जा किया था। म्हारे खिलाड़ी चार साल से लगातार राज्य प्रतियोगिता जीतते आ रहे हैं।
कुरुक्षेत्र के भिवानी खेड़ा गांव में ताइक्वांडो एनडी क्लब की ओर से सामुदायिक केंद्र में ताइक्वांडो अकादमी चलाई जा रही है। इस क्लब में नेशनल खिलाड़ी एवं रेफरी अंकिता सैनी 50 ज्यादा खिलाड़ियों को खेल के गुर सिखा रही हैं। हालांकि समय-समय पर एसोसिएशन के जिला प्रधान अशोक सैनी भी उनको खेल की बारीकियां सिखाने पहुंचते हैं। क्लब के 12 खिलाड़ी सुनैना, आरजू, रबजोत कौर, महिप, शौर्या, जश्न, अनिकेत, हर्ष, हरमन, वंशिका, कन्या और अंशिका अपनी किक के बूते स्कूल, विश्वविद्यालय, राज्य और राष्ट्र स्तर पर 100 से ज्यादा मेडल जीत चुके हैं।
जिला प्रधान अशोक सैनी ने बताया कि करीब तीन साल पहले भिवानी खेड़ा गांव में ताइक्वांडो की अकादमी शुरू की गई थी। इस अकादमी में 50 से ज्यादा खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। यह अकादमी भी उनके द्वारा ही शुरू की गई थी। हाल ही में उनके 13 खिलाड़ियों को साढ़े 13 लाख रुपये की छात्रवृत्ति मिली है। वहीं अंकिता सैनी ने बताया कि उसने खुद भी इस अकादमी में अभ्यास करके रेफरी का कोर्स का टेस्ट दिया था, जिसके बाद उसका चयन नेशनल रेफरी के तौर पर हुआ है। इसके अलावा उसने हाल ही में कोच के लिए छह सप्ताह का कोर्स किया है। इसका पूरा श्रेय उनके कोच रहे अशोक सैनी को जाता है।
राज्य प्रतियोगिता में जीते छह स्वर्ण : रबजोत
रबजोत कौर ने बताया कि वह राज्य प्रतियोगिता में छह बार स्वर्ण पदक हासिल कर चुकी है। गत वर्ष ओडिशा में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी में जूनियर वर्ग में गोल्ड अपने नाम किया था। एशियन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए वह कड़ी मेहनत कर रही है। ओलंपिक में देश को स्वर्ण पदक समर्पित करना उसका सपना है।
खेलो इंडिया में चलाई किक : वंशिका
वंशिका ने बताया कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उसने कई प्रतियोगिताएं जीती हैं, मगर अपने जिले से खेलो इंडिया में खेलना उसके लिए बेहतरीन रहा। हालांकि कोई खिताब अपने नाम नहीं कर पाई। वह अब मेडल लाने के लिए खूब अभ्यास कर रही है। उसका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने गांव,शहर, कोच, अकादमी और माता-पिता का नाम रोशन करना है।
नेशनल में सब जूनियर वर्ग में जीता रजत : हर्षित
हर्षित का कहना है कि तीन साल से वह प्रशिक्षण ले रहा है। इस दौरान उसने पिछले ही साल ओडिशा के कटक में राष्ट्रीय स्तर पर हुई प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीता था। इसके अलावा वह राज्य की स्कूल स्तर पर हुई प्रतियोगिताओं में चार बार स्वर्ण पदक जीत चुका है। किसी भी काम की शुरुआत आसान नहीं होती, मगर अभ्यास से उसे आसान बनाया जा सकता है।
भाई से कम नहीं हरमन
हरमन अपने भाई हर्षित से खेल के मामले में कुछ कम नहीं है। दोनों भाई राष्ट्रीय और स्कूल स्तर प्रतियोगिताओं में स्टार बनकर उभरे हैं। हरमन ने भी अपने भाई की तरह मेडल जीते हैं। दोनों भाई अकादमी के बाद घर आकर भी अभ्यास करते हैं। हरमन का कहना है कि घर आकर प्रैक्टिस करना मानो उनके लिए बोनस के जैसे है।
कुरुक्षेत्र। रेफरी अंकिता सैनी।
कुरुक्षेत्र। रेफरी अंकिता सैनी।
कुरुक्षेत्र। रेफरी अंकिता सैनी।
कुरुक्षेत्र। रेफरी अंकिता सैनी।
कुरुक्षेत्र। रेफरी अंकिता सैनी।