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प्रकृति हमारी मां, प्रकृति ही हमारी शिक्षक है और प्रकृति ही हमारे जीवन का आधार

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वन विभाग की पहल पर ब्रह्मसरोवर के तट पर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सहयोग से ग्रंथ अकादमी हरियाणा के सानिध्य में आयोजित पुस्तक मेले का समापन हुआ। समापन समारोह में 48 कोस परिक्षेत्र में संचालित स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए वादा किया और यह शपथ लिया कि अब हम सिर्फ पौधरोपण ही नहीं करेंगे, बल्कि पहले से रोपे गए पौधों को संभाल कर वृक्ष बनाएंगे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में हरियाणा के प्रधान मुख्य वन संरक्षक वीएस तंवर ने कहा कि हरि का अरण्य यानि भगवान का जंगल जो कंक्रीट के जंगल में बदला था उसे फिर से वनाच्छादित हरियाणा में सामुदायिक हिस्सेदारी से स्थापित करेंगें। उन्होंने इस अवसर पर आयोजित ललित कला विभाग के विद्यार्थियों द्वारा निर्मित कलाकृतियों की प्रशंसा की और उन्हें पारितोषिक देकर सम्मानित किया। कहा कि शिविर में निर्मित कलाकृतियां उत्कृष्ट हैं। इन्हें वन भवन की दीवारों पर प्रदर्शित किया जाएगा। इस अवसर पर प्रख्यात चित्रकार डॉ. राम विंरजन ने कहा कि वासुदेव कृष्ण सभी कलाओं के प्रतिमूर्ति हैं। भारतीय संस्कृति ऐसी स्थापना है कि जो कला प्रकृति और विचार तीनों के संगम हैं। मुख्य वन संरक्षक जी रमण ने कहा कि वन विभाग हरियाणा ने प्रकृति शिक्षा के क्षेत्र में अभिनव प्रयोग किया है। संरक्षक वन निवेदिता ने कहा कि प्रकृति हमारी मां, प्रकृति ही हमारी शिक्षक है। प्रकृति ही हमारे जीवन का आधार है। डीएफओ राकेश कुमार ने कहा कि यह उत्सव प्रकृति उत्सव है। संयुक्त परिवहन आयुक्त निर्मल नागर ने कहा कि वासुदेव युद्ध में बिना शस्त्र धारण किए न्याय की सारथी के रूप में अवधारणा को साकार करते हैं। वन मंडल अधिकारी रविंद्र धनखड़ ने कहा कि प्रकृति जीवन का आधार है। इसे संवारने के लिए समाज के सभी वर्गों को आगे आना होगा। इस अवसर पर मंडलीय प्रचार अधिकारी सरोज पंवार, धर्मवीर, राजीव रंजन, डिप्टी रेंजर तरुण कुमार, रोशन लाल, राकेश कुमार, रीता राय, संदीप, खेमचंद, परवेश कुमार, सुशील कुमार सहित अन्य मौजूद रहे।
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