कुरुक्षेत्र। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि देश के किसानों को आर्थिक तौर पर समृद्ध बनाने के लिए प्राकृतिक खेती एक बेहतर विकल्प है। यदि हमें अपनी देसी गाय, जल, जंगल, जमीन और जलवायु को बचाना है तो इसके लिए प्राकृतिक खेती ही एकमात्र उपाय है।
राज्यपाल गुरुकुल कुरुक्षेत्र में प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग के लिए आए किसानों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि ‘प्राकृतिक कृषि मिशन’ देश में बड़ा जन आंदोलन बनता जा रहा है। वर्तमान में रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव से जल, वायु और पर्यावरण तो दूषित हो ही रहा है, जमीन भी बंजर हो रही है।यूरिया, रासायनिक खाद और केमिकल अन्न व फल-सब्जियों के माध्यम से हमारे शरीर में जाते हैं, जिससे कैंसर, हार्ट अटैक, बीपी, शुगर जैसी गंभीर बीमारियां होती है।
राज्यपाल ने बताया कि उनके प्रयासों से गुजरात में प्राकृतिक कृषि से पांच लाख से ज्यादा किसान जुड़कर सीधा लाभ ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि गुजरात में प्रत्येक तहसील के 10-10 गांवों का एक क्लस्टर बनाकर उसमें एक किसान को प्राकृतिक खेती का मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा, जिसे सरकार प्रोत्साहन राशि भी उपलब्ध कराएगी।
गुरुकुल के व्यवस्थापक रामनिवास आर्य ने बताया कि इस प्रशिक्षण शिविर में गुजरात के महसाना जिला के 45 किसान गुरुकुल कुरुक्षेत्र पहुंचे थे। इस दल में किसानों के साथ जिला महसाना के कृषि विस्तार अधिकारी जस्सूजी चौहान, कृषि अधिकारी गोसाई सचिन गिरी और कौशिक पटेल भी पहुंचे।
किसानों को डॉ. हरिओम ने प्राकृतिक कृषि के बारे में विस्तार से समझाया, उनके साथ कृषि अधिकारी कृषि अधिकारी डॉ. विनोद कुमार, डॉ. रामगोपाल शर्मा, डॉ. दिनेश ने भी किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत निर्माण विधि का प्रेक्टिकल करवाया। किसानों ने प्राकृतिक कृषि फार्म, गुरुकुल की गोशाला, जीवामृत निर्माण केंद्र, प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण केंद्र को देखा।