कुरुक्षेत्र। श्रावण मास में सेक्टर-13 स्थित श्री महेश्वर हनुमान मंदिर में प्रवचन हुए। कथावाचक अनिल शास्त्री ने भगवान कार्तिकेय के जन्म और जीवन प्रसंग की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि छह कृतिकाओं ने भगवान शिव के तेज को गर्भ में धारण किया था। शिव के अत्यधिक ताप से वे तेज को अधिक समय तक धारण नहीं कर सकीं। इसके बाद माता पार्वती ने छह अल्प-विकसित भ्रूणों को एक स्वरूप दिया। इससे भगवान कार्तिकेय का प्राकट्य हुआ। उन्हें छह मुख वाले देवता के रूप में भी जाना जाता है। भगवान कार्तिकेय ने देवासुर संग्राम में देवताओं का नेतृत्व किया। उन्होंने राक्षस तारकासुर का वध किया। दक्षिण भारत में उन्हें भगवान मुरुगन के नाम से विशेष श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। इस अवसर पर चौधरी ओम प्रकाश बेनीवाल, माया देवी, पंडित दिनानाथ शर्मा सहित कई श्रद्धालु मौजूद रहे। संवाद