कुरुक्षेत्र। डेंगू से निपटना इस बार जिला स्वास्थ्य विभाग के लिए आसान नहीं होने वाला है। गत वर्ष आई बाढ़ के बाद विभाग ने डेंगू से निपटने के लिए वर्ष की शुरुआत में अभियान आरंभ कर दिया था, मगर एनएचएम कर्मियों की हड़ताल ने विभाग के कार्य योजना पर पानी फेरने का काम किया है।
दरअसल, प्रदेश के एनएचएम कर्मी 17 दिन से अपनी मांगों के समर्थन में हड़ताल पर है। उनकी हड़ताल से डेंगू से बचाव की गतिविधियां ढीली पड़ गई है। इसका असर अभियान पर साफ दिख रहा है। उधर, रुक-रुक हो रही बारिश ने भी विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी। बारिश की वजह से खाली प्लॉट, गड्ढों, टूटे बर्तन समेत अन्य स्त्रोत में पानी जमा होने से मच्छरों की तादाद बढ़ रही है, मगर हड़ताल के चलते एंटी लारवा गतिविधियों पर उसका असर दिख रहा है।
विभाग के लिए राहत भरी बात सिर्फ यह है कि जिले में अभी तक लिए गए डेंगू के 88 संदिग्ध लोगों के सैंपल में चार लोग पॉजिटिव पाए गए। इनमें से भी तीन लोग जिले के बाहर रिपोर्ट किए गए हैं। शनिवार को 6,589 घर व 7,895 पानी के अन्य स्रोत की जांच की गई। इसमें 16 जगह से डेंगू का लारवा बरामद हुआ, जिसमें टीम ने 14 लोगों को नोटिस दिया है। डेंगू से निपटने के अभियान के तहत टीम 6,30,135 घर और 8,59,404 कंटेनर जांच चुकी है। इसमें 604 जगह से लारवा मिलने पर 378 को नोटिस दिया गया है।
हड़ताल से सुस्त पड़ी गतिविधियां
हड़ताल की वजह से एंटी लारवा गतिविधि, जांच, जागरूकता कार्यक्रम और सैंपलिंग का कार्य प्रभावित हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में चलने वाली यह गतिविधियां मंद पड़ी हैं, जबकि शहरी क्षेत्र में कोई इसका असर पड़ रहा है। पिछले साल आई बाढ़ के बाद जिले में डेंगू के रिकॉर्ड 263 मामले दर्ज किए गए। कई गांव और कॉलोनी में डेंगू संदिग्ध और डेंगू के मामले अचानक बढ़ गए थे।
नियमित कर्मी चला रहे अभियान : सभ्रवाल
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. रमेश सभ्रवाल ने बताया कि डेंगू से निपटने के लिए चल रही गतिविधियां चल रही है। शहरी क्षेत्र में नियमित कर्मी और ग्रामीण क्षेत्र में आशा कार्यकर्ता के जरिए अभियान चल रहा है। डेंगू से निपटने के लिए विभाग की पूरी तैयारी है। फॉगिंग के साथ एंटी लारवा गतिविधियां चल रही है।
कुरुक्षेत्र। पानी की टंकी की जांच करता कर्मी।