इस्माईलाबाद। धान के खेत में पड़ी दरारें।
कुरुक्षेत्र/इस्माईलाबाद। जिलेभर में कम बारिश होने से अब धान की फसलों पर असर पड़ने लगा है, जिससे कई जगहों पर धान की फसल सूखने लगी हैं तो वहीं खेत में भी दरारें आने लगी हैं। अब तक मानसून के खाली जाने से बारिश नहीं हुई, जिससे किसानों के चेहरों पर मायूसी देखने को मिल रही हैं। किसान अभी भी मानसून की बारिश होने की बाट जोह रहे हैं। जिलेभर में नौ जुलाई को बारिश हुई थी, इसके बाद मौसम ने करवट ली और आसमान में कभी धूप तो कभी बादलों के छाने का सिलसिला जारी है, इससे उमस भरी गर्मी का असर भी बढ़ा है।
पिछले साल के मुकाबले इस बार काफी कम बारिश हुई है। इससे धान की फसल के उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। किसान सौरव, कृष्ण, राजेश, बलदेव ने बताया कि जून के अंतिम सप्ताह व जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बरसात हो जाती थी, लेकिन इस साल मानसून जल्दी आने के बाद भी अच्छी बारिश नहीं हो पाई। किसानों ने जैसे तैसे कर धान रोपाई का कार्य तो पूरा कर लिया, लेकिन अब रोपाई की गई धान की फसल में पानी नहीं आ रहा है जिससे फसल सूखने की कगार पर है।
वहीं उमस भरी गर्मी का आभास रविवार को भी हुआ। सुबह से ही तेज धूप खिली उठी और लोगों को दिनभर उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ा। उमस भरी गर्मी से बचने के लिए लोग एसी, कूलरों और पंखों का सहारा लेते नजर आए। रविवार को अधिकतम तापमान 36.1 डिग्री व न्यूनतम 28.2 डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि सोमवार को अधिकतम तापमान 35 डिग्री व न्यूनतम 29 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।
मानसून के फिर से सक्रिय होने के आसार : डॉ. सीबी सिंह
कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीबी सिंह का कहना है कि खेतों में धान की फसल की रोपाई लगभग हो चुकी है। किसान अब बारिश होने का इंतजार कर रहे है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेशभर में कई क्षेत्रों में मानसून की स्थिति अब तक काफी कमजोर रही है, लेकिन अब अगले दो तीन दिनों में मानसून के फिर से सक्रिय होने की संभावना बनी हुई है। बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने के कारण मानसून की सक्रियता कम हो गई थी। अभी आगामी 10 दिनों तक मौसम बार-बार परिवर्तनशील रहेगा।