कुरुक्षेत्र। मानसून की बारिश न होने से अब किसानों की चिंता बढ़ने लगी हैं। धान की फसल को पानी की जरूरत होने के चलते अब किसान बारिश होने की बाट जोह रहे हैं। जिले भर में अब तक पिछले साल के मुकाबले काफी कम बारिश हुई हैं, जिससे किसानों के चेहरों पर मायूसी बनी हुई हैं। जिले भर में अब धान की रोपाई लगभग हो चुकी हैं, जो कि 15 जून से शुरू हुई थी।
शनिवार को सुबह से ही धूप खिल उठी, जिससे पारा बढ़ने लगा और मौसम में बदलाव नजर आया। दोपहर को तेज धूप से बचने के लिए लोगों ने जहां पेड़ों का सहारा लिया तो वहीं उमस भरी गर्मी से राहत पाने के लिए लोग एसी, कूलरों और पंखों का सहारा लेते रहे। उमस भरी गर्मी का सिलसिला दिनभर जारी रहा।
वहीं बारिश की बाट जो रहे किसान धर्मबीर सिंह का कहना है कि धान की रोपाई अब जिले भर में लगभग हो चुकी हैं। धान की फसलों की रोपाई 15 जून से शुरू हुई थी, जो फसलें शुरुआती दौर में लगाई गई थी, उन्हें ज्यादा पानी की जरूरत होती हैं, इसके लिए बारिश होना फायदेमंद रहता है। बारिश होने से धान की फसल के उत्पादन में वृद्धि होती हैं, लेकिन इस बार पिछले साल के मुकाबले बारिश नहीं हो पाई है, इससे ट्यूबवेल का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे जहां बिजली की खपत ज्यादा हो रही हैं तो वहीं किसानों को मेहनत भी ज्यादा करनी पड़ रही हैं।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. सीबी सिंह का कहना है कि मौसम में बदलाव के चलते अगले तीन दिनों में बारिश होने के आसार कम रहेंगे। धूप खिलने व कभी-कभी आसमान में बादल छाए रहने की संभावना रहेगी। जबकि वीरवार को हल्की बारिश होने के आसार रहेंगे।
फसल के उत्पादन पर पड़ेगा बारिश न होने का असर
झांसा के किसान सतबीर सिंह, जयकुमार व भिवानी खेड़ा के राजेश का कहना है कि उम्मीद व जरूरत अनुसार इस बार अभी तक बारिश नहीं हुई है। धान की रोपाई अधिकतर हो चुकी है और बारिश न होने से फसल में फुटाव पूरा नहीं होगा, जिसका उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। मानसून सीजन में बारिश झमाझम होनी चाहिए, तभी धान की फसल लहलहाएगी।