कुरुक्षेत्र/ इस्माईलाबाद। सिक्किम में शहीद हुए फौजी गुरसेवक सिंह का शव मेघा माजरा गांव में सायं करीब पांच बजकर 50 मिनट पर सेना की गाड़ी में लाया गया। शव गांव पहुंचते ही पूरे गांव व आसपास गांवों के लोग शहीद के अंतिम दर्शन करने के लिए उमड़ पड़े। हर किसी की आंख नम थी। सात वर्षीय बेटे ने शहीद के शव को मुखाग्नि दी तो पूरा गांव शोक में डूब गया तो वहीं लोग गुरसेवक सिंह अमर रहे के नारे भी लगाते रहे।
जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम पिहोवा अमन कुमार, नायब तहसीलदार पिहोवा संजीव कुमार, थाना प्रभारी के अलावा सांसद नवीन जिंदल के पीए बलविंद्र सिंह भी पहुंचे। उसके बाद पुलिस की टुकडी ने गार्ड ऑफ ऑनर के सम्मान के बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया। सेना में नायक के पद पर तैनात गुरसेवक सिंह नागरा सिक्किम के पाक्योंग जिले के जुलुक जाते हुए सड़क हादसे में शहीद हो गए थे। हादसे की सूचना के बाद से ही गांव में मातम पसरा रहा। लोग सुबह से शव पहुंचने की इंतजार कर रहे थे। जैसे ही शहीद का शव आया तो परिजनों का बुरा हाल हो गया। गांव व क्षेत्र से आए सभी लोगों की आंखें भी नम हो गईं। प्रशासन के अधिकारियों ने शव पर पुष्पचक्र चढ़ाकर शहीद को श्रद्धांजलि दी।
गुरसेवक सिंह नागरा करीब एक महीने की छुटि्टयां बिताकर पिछले शनिवार को ही डयूटी पर गए थे। पांच सितंबर को भारतीय सेना का ट्रक भारत चीन बॉर्डर के पास नॉर्थ सिक्किम में भीषण हादसे का शिकार हो गया था। ट्रक करीब 800 फीट गहरी खाई में गिर गया था। इसी ट्रक में ही चार जवान सवार थे। चारों जवान मौके पर ही शहीद हो गए। उन जवानों में गुरसेवक सिंह भी थे।
शहीद गुरसेवक के परिवार में माता बीरमति देवी, पत्नी गुरजीत कौर व दो बच्चे अगमबीर सिंह व नवशिरत कौर है। नायक गुरसेवक सिंह के पिता का कुछ वर्ष पहले निधन हो गया था। करीब 32 वर्षीय गुरसेवक सिंह 12 वर्ष पहले ही सेना में भर्ती हुए थे। उनके निधन पर पूरा गांव शोक में डूबा हुआ था। मां, पत्नी और बच्चों पर गम का पहाड़ टूट पड़ा है। नायक गुरसेवक नागरा को उनके सात वर्षीय पुत्र अगमबीर ने मुखाग्नि दी।