संवाद न्यूज एजेंसी
शाहाबाद। पहाड़ों में हो रही बरसात के कारण शनिवार को करीब आठ हजार क्यूसेक पानी मारकंडा नदी में आ गया। पानी सुबह करीब 6 बजे आना शुरू हुआ और दोपहर तीन बजे तक करीब आठ हजार क्यूसेक पानी में नदी में बहने लगा। नदी में उफान आने से मुहाने पर स्थित गांवों कठवा व कलसाना की सड़कों पर पानी पहुंच गया। हालांकि प्रशासन की तरफ से पहले ही इन गांवों में मुनादी करवाकर अलर्ट कर दिया जाता है।
मारकंडा में पहाड़ों के पानी के साथ-साथ काला अंब व साढौरा नदी व वेघना नदी का भी पानी पहुंचता है। पहाड़ों पर बरसात जारी है। इससे मारकंडा नदी में पानी की मात्रा बढ़ सकती है। पानी बढ़ने से साथ लगते खेतों को कुछ नुकसान हो सकता है। बाढ़ का पानी निकटवर्ती गांवों व बाजीगर कॉलोनी तथा मारकंडा कॉलोनी में नुकसान पहुंचाता है। यह बरसाती पानी गांव अरूप नगर, गुमटी, दयाल नगर, मुगल माजरा, मदनपुर व मोहनपुर आदि गांवों के अलावा अनेक डेरे भी बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं।
जब भी मारकंडा नदी में ज्यादा पानी आता है तब ही कॉलोनी वासियों को इस की मार सहनी पड़ती है। इस नदी के जल का प्रयोग लोग धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी करते हैं। किदवंति के मुताबिक इंद्र देवता को प्रसन्न करने के लिए शाहाबाद और इसके साथ लगते सैकड़ों गांवों के किसान ऋषि मारकंडेश्वर मंदिर और मारकंडेय नदी में प्रसाद चढ़ाते हैं। किसान नदी में पानी आने पर मारकंडा नदी में अपनी इच्छा अनुसार सोने का घोड़ा भी भेंट करते हैं ताकि मारकंडा नदी के पानी से उनकी फसलों का नुकसान न हो।
ऐसा विश्वास भी है कि मारकंडा नदी के जल में नहाने से लोगों के शारीरिक कष्ट दूर होते हैं, लेकिन नदी में जल न आने के कारण दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं को खाली लौटना पड़ रहा था। जानकारी के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में कालाआंब की पहाड़ियों से बहती हुए मारकंडा नदी शाहाबाद पहुंचती है और आगे गुहला-चीका के निकट घग्गर नदी में मिल जाती है।