कुरुक्षेत्र/ इस्माईलाबाद/ झांसा। भले ही बारिश थमे मंगलवार को दूसरा दिन हो गया, लेकिन नदी से नहरें भी पूरे उफान पर रही। गांव नैसी के पास मारकंडा, ठोल के पास नरवाना ब्रांच नहर व गांव दबखेड़ी के पास ड्रेन टूट गई, जिससे आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों एकड़ क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बन गए। खेतों में ही नहीं गांवों तक भी पानी पहुंच गया। सिंचाई विभाग की टीमें, सैकड़ों मनरेगा मजदूर भरसक प्रयास के बावजूद भी नहरों की करीब 50 फीट तक टूटी पटरियां दुरुस्त नहीं कर पाए। शाम समाचार लिखे जाने तक भी तीनों जगहों से पानी का तेज बहाव जारी रहा, जिससे आसपास के गांवों में भय का माहौल बना रहा।
तीनों जगहों पर डीसी शांतनु शर्मा खुद निगरानी पर रहे तो वहीं अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की टीमें भी फील्ड में उतारी। डीसी ने स्थिति पर जल्द काबू पा लिए जाने का भरोसा दिया तो वहीं तीनों जगहों पर सैकड़ों ग्रामीण भी जमे रहे तो वे भी मजदूरों के सहयोग में शामिल रहे।
नरवाना ब्रांच नहर का तटबंध टूटा
इस्माईलाबाद। ठोल गांव के समीप से गुजर रही नरवाना ब्रांच नहर का तटबंध टूटा तो आसपास के क्षेत्र में हाहाकार मच गया है। मौके पर मौजूद किसानों ने तटबंध को बांधने का प्रयास किया, लेकिन पानी के तेज बहाव के आगे प्रबंध टिक नहीं सके। देखते ही देखते आसपास के खेत जलमग्न हो गए। सूचना मिलते ही डीसी शांतनु शर्मा, एसडीएम सोनू राम, नायब तहसीलदार राधेश्याम, नहरी विभाग व पुलिस विभाग के अधिकारी भी दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। नहरी विभाग द्वारा तटबंध को बांधने का प्रयास किया, सफल नहीं हो सका।
मारकंडा नदी का तटबंध रविवार को ही नैसी गांव के समीप से टूट जाने से हजारों एकड़ फसल पानी में डूब गई थी। सोमवार को प्रशासन ने कड़ी मशक्कत के बाद तटबंध को बांधा था, लेकिन मारकंडा नदी में आए उफान ने तटबंध को दोबारा से तोड़ दिया। जानकारी के अनुसार मारकंडा नदी में आए उफान से तटबंध करीब 60 फुट तक फिर से टूट गया। वहीं पिछले कई दिनों से खतरे के निशान से ऊपर चल रही नरवाना ब्रांच नहर का तटबंध गांव ठोल के समीप से टूट जाने से शहर व गांव हिंगोखेड़ी सहित आसपास के क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति बन गई। नरवाना ब्रांच नहर का पानी गांव ठोल, खेड़ी, अजरावर, ठसका मीरांजी, इस्माईलाबाद तक पहुंच चुका है। वहीं गांव नैसी, टबरा, शेरगढ, मडाडो, जंधेडी, जोधपुर, बालापुर, कलावड़, दानीपुर, तंगोली, जखवाला आदि गांवों के लिए भी देर शाम को ही खतरा बन गया था।
टूटी ड्रेन को लेकर पहले की लापरवाही फिर हाथ-पांव फूले
दबखेड़ी गांव के पास सोमवार शाम को ही एसवाईएल के साथ बह रही ड्रेन गांव जोगनाखेड़ा की ओर टूट गई थी। पहले महज दो से चार फीट तक ही थी। आसपास के लोगों ने तभी प्रशासन को सूचना दी, लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और देखते ही देखते टूटा किनारा खिसकता गया। मंगलवार सुबह जब 15 फीट तक कट हो गया तो प्रयास शुरू किए गए, लेकिन पानी के तेज बहाव के कारण पटरी में कटाव जारी रहा और देखते ही देखते करीब 50 फीट तक पहुंच गया। हालांकि इसे दुरुस्त करने के लिए आसपास के आधा दर्जन गांवों से मनरेगा मजदूर भी बुलाए तो जेसीबी, जाली, मिट्टी से भरे कट्टे व अन्य सामान के साथ दोपहर तक प्रयास किया जाता रहा, लेकिन सफल नहीं हो पाए। दोपहर करीब दो बजे डीसी शांतनु शर्मा भी पहुंचे तो हालात का जायजा लिया। देर शाम समाचार लिखे जाने तक भी ड्रेन की टूटी पटरी ठीक नही की जा सकी। इससे गांव जोगना खेड़ा, नरकातारी के अलावा शहर की दीदार नगर, शांति नगर, कल्याण नगर, आजाद नगर सहित आसपास की अन्य कॉलोनियों पर भी बाढ़ का खतरा बना रहा।
इस्माईलाबाद। ठसका रोड पर भरा पानी ।
इस्माईलाबाद। ठसका रोड पर भरा पानी ।
इस्माईलाबाद। ठसका रोड पर भरा पानी ।