गीता के मर्म पर बनाई ऑडियो-वीडियो फिल्म
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उपहार में मिली गीता ने स्थानीय सिविल जज पुनिता बशामबू वर्मा का जीवन ही बदल दिया। गीता पढ़ने से उन पर ऐसा असर हुआ कि उन्होंने इसके संदेश को आम लोगों तक पहुंचाने का मन बना लिया। जिसके चलते उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर दस मिनट की एक डॉक्युमेंट्री बनाई है। शनिवार को रिलीज की गई डॉक्युमेंट्री लोगों को अपने समय का सदुपयोग करना भी सिखाएगी।
सिविल जज पुनिता कहती है कि 'कुरुक्षेत्र वो स्थान है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने मानव कल्याण के लिए दैवीय ज्ञान दिया और मैं आज उसी कुरुक्षेत्र में सेवारत हूं। महाभारत की इस धरती से बड़ी हिम्मत मिली, जिससे आगे चलकर उन्हेें गीता पर आधारित लघु वृत्तचित्र बनाने की प्रेरणा मिली। उन्होंने बताया कि जब डॉक्युमेंट्री की कहानी लिखनी शुरू कर दी और स्क्रिप्ट अपने पति अनिकेत वर्मा को दिखाई तो उन्होंने भी इसे सराहा, जिससे उनका साहस और बढ़ गया। इसके बाद ही दोनों ने 'विज्डम नामक डॉक्युमेंट्री बनाई। उन्होंने बताया कि डॉक्युमेंट्री में इसमें नई पीढ़ी को ध्यान में रखते हुए सरल शब्दों में यह बताने की कोशिश की है कि गीता में हमारे लिए सीखने के लिए क्या है? वह कहती हैं युवाओं के पास यह सब विस्तार से जानने के लिए न तो समय है और न ही जिज्ञासा। इसमें मोटे तौर पर बताया गया है कि इंटेलीजेंस दिमाग में भरे गए तथ्यों का भंडार है और हमें इससे आगे ज्ञान के स्तर पर जाने की जरूरत है।
सोच में इस बदलाव से मानव जीवन में सुधार शुरू हो जाता है। प्रोड्यूसर अनिकेत वर्मा ने बताया, 'यह डॉक्युमेंट्री एवं पोर्टल 1893 में स्वामी विवेकानंद और जमशेदजी टाटा के बीच हुए एक चर्चित संवाद से प्रेरित है। दोनों महापुरुषों ने विज्ञान एवं अध्यात्म पर चर्चा करते हुए जीवन में ज्ञान के महत्व पर बात की थी। इसमें ऐसे सफल लोगों की जीवनशैली को दर्शाया गया है जो भौतिक रूप से तो सामान्य रहे, परंतु जिन्होंने संतुष्टि, प्रसन्नता और शांति का जीवन जीया। वृत्तचित्र हमें उनके पथ पर चलने की शिक्षा देती है।