दयानंद महिला महाविद्यालय में इतिहास परिषद की ओर से विभागाध्यक्षा डॉ रूकमेश चौहान के निर्देशन में भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन व महात्मा गांधी विषय पर विस्तार व्याख्यान का आयोजन करवाया गया। मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. अमरजीत सिंह (फार्मर चेयरमैन तथा फार्मर डायरेक्टर, बाबा बंदा सिंह बहादुर चेयर रहे। सर्वप्रथम महाविद्यालय की प्राचार्य मीनाक्षी ठकराल ने मुख्य अतिथि का औषधीय पौधा भेंट कर उनका स्वागत किया।
डॉ. अमरजीत ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास 1757 प्लासी के युद्ध से शुरू होकर 1947 तक चलता है, इन सभी संघर्ष में हर तरह का विशेष वर्ग देखने को मिलता है। 19वीं-20वीं शताब्दी के मध्य बहुत से आंदोलन चले, चाहे वह किसान आंदोलन हो या मजदूर आंदोलन, लेकिन गांधी का आंदोलन इस सभी से अलग है। इनके आंदोलन में मध्यम वर्ग, पूंजीपति वर्ग, मजदूर वर्ग, ग्रामीण व शहरी वर्ग, विद्यार्थी व महिलाओं आदी की भूमिका देखने को मिलती है, बाकी सभी आंदोलन जाति, धर्म, वर्ग की बात करते हैँ। परंतु गांधी के किसी भी आंदोलन में ऐसा नजर नहीं आता । गांधी के बारे में सुभाष चन्द्र बोस ने अपनी पुस्तक ‘इंडियन स्ट्रगल’ में लिखा है कि जब वे साबरमती से डांडी के लिए चले, तब सभी वर्ग उनके साथ-साथ चल रहे थे, उस समय ऐसा लग रहा था, मानो समूचा भारत उनके पीछे चल रहा हो। गांधी की ब्रिटिश सरकार के खिलाफ विचारधारा भारतीय सभ्यता से ली, वह स्वंय सबकुछ कर रहे थे , इसलिए परिस्थितियों के अनुसार हमें उनके विचारों में भी परिवर्तन दिखाई देता है।
महाविद्यालय की प्राचार्य मीनाक्षी ठकराल ने कहा कि महात्मा गांधी के राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान को देखते हुए भारतीय समाज उनका हमेशा ऋणी रहेगा। इस अवसर पर महाविद्यालय की लगभग 158 छात्राओं ने भाग लिया। महाविद्यालय की अन्य प्रधानाध्यापिकाओं में डॉ. सुमन राजन, डॉ. मनजीत कौर, डॉ. नेहा, उर्मिला सिंह, सरोज बाला, मनीषा उपस्थित रही।