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सरस्वती तीर्थ स्थित पृथ्वेश्वर महादेव पृथुदक तीर्थ (पिहोवा) के आधारभूत

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सरस्वती तीर्थ के तट पर पृथ्वेश्वर महादेव का ऐतिहासिक मंदिर स्थित है। पृथ्वेश्वर महादेव मंदिर महाराजा पृथु की नगरी के अधिष्ठाता स्वामी हैं। स्थानीय लोग पृथ्वेश्वर महादेव को बड़ा शिवालय के नाम से भी जानते हैं। श्रावण में पृथ्वेश्वर महादेव मंदिर में पूजा का विशेष महत्व है। यहां श्रावण माह के प्रत्येक सोमवार को पार्थेश्वर शिवलिंग (मिट्टी से तैयार शिवलिंग) का विशेष शृंगार रुद्राभिषेक किया जाता है। इसके उपरांत पार्थेश्वर शिवलिंग का सरस्वती में विसर्जन कर दिया जाता है।
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महंत बंसी पुरी ने बताया कि पृथ्वेश्वर महादेव पृथुदक तीर्थ (पिहोवा) के आधार भूत (स्वामी) हैं। मान्यता है कि महाराजा पृथु ने इस लिंग की प्रतिष्ठा की थी। महाराजा पृथु के नाम पर ही इस नगर का नाम पृथुदक विख्यात हुआ। महाराज पृथु जो कि पृथ्वी के प्रथम महाराज थे, जिनका जन्म राजा वेन के शरीर का मंथन से हुआ था। महाराजा पृथु ने अपने पिता वेन का इस तीर्थ पर तर्पण किया था। तब महाराजा पृथु ने अपने पिता की पुण्य स्मृति में यहां शिवलिंग की प्रतिष्ठा की थी। महाराजा पृथु द्वारा लिंग की प्रतिष्ठा होने से इन्हें पृथ्वेश्वर महादेव कहा जाता है तथा यह लिंग अष्टकोणी है।
महंत बंसी पुरी ने बताया कि मुस्लिम आक्रांता अहमद शाह अब्दाली ने मंदिरों, मठ व तीर्थों को खूब लूटा और ध्वस्त भी कर दिया। अहमदशाह अब्दाली ने पृथ्वेश्वर महादेव मंदिर में भी खूब तोड़फोड़ की। मंदिर के सभागार में बने अष्टकोणी 16 स्तंभ को तोड़ दिया। मंदिर तथा स्तंभ पर के चारों ओर बनी बेहतरीन नक्काशी वाली मूर्तियों को भी ध्वस्त कर दिया था।
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पानीपत की लड़ाई में मुगलों पर मराठों की जीत के उपरांत सदाशिव राव भाऊ ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। उसके बाद समय-समय पर इस मंदिर का निर्माण होता रहा। मंदिर के स्तंभों का कुछ हिस्सा आज भी एक अन्य मंदिर में सुरक्षित रखा गया है।
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