कुरुक्षेत्र। भगवान जगन्नाथ अपने रथ में बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नगर भ्रमण को निकले। इस्कॉन की ओर से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा ब्रह्मसरोवर के गौड़िया मठ के सामने से शुरू हुई। सांसद नायब सैनी और विधायक सुभाष सुधा ने भगवान जगन्नाथ के रथ यात्रा के सामने नारियल फोड़कर और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा की आरती कर यात्रा का शुभारंभ किया।
सांसद नायब सैनी व विधायक सुभाष सुधा ने रथ के आगे झाड़ू भी लगाई। रथयात्रा में दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु हरे कृष्णा-हरे रामा का उद्घोष करते हुए रथ के साथ चल रहे थे। सभी श्रद्धालुओं में रथयात्रा को लेकर अलग ही उत्साह नजर आया। इस मौके पर विधायक सुभाष सुधा ने कहा कि धर्मनगरी को पर्यटन की नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है ताकि आने वाले श्रद्धालु धर्मनगरी की एक अच्छी और साफ-सुथरी छवि लेकर जाएं। ज्योतिसर स्थित इस्कॉन संस्था द्वारा श्रीकृष्ण-अर्जुन मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। मंदिर में विश्व की सबसे बड़ी गीता भी स्थापित की जाएगी। इसका निर्माण कार्य भी चल रहा है।
इस्कॉन के अध्यक्ष साक्षी गोपाल दास ने कहा कि पांच हजार वर्ष पहले इस यात्रा का शुभारंभ धर्मनगरी से ही शुरू हुआ था। कंस वध के पश्चात भगवान श्रीकृष्ण को पहली बार गोपियां सूर्यग्रहण स्नान के समय ब्रह्मसरोवर पर मिली थीं। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण को वृंदावन ले जाने का आग्रह किया तो भगवान ने अपने रथ के घोड़े खोल दिए। तब गोपियां ही उनके रथ को खींचकर वृंदावन लेकर गई थीं। उन्होंने कहा कि भगवान के इस रथ को खींचने वाला और उनके दर्शन करने वाले श्रद्धालु के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। सन 1967 में पहली बार अमेरिका में रथ यात्रा निकाली गई। आज संसार में सभी देशों में जगन्नाथ रथ यात्रा का आयोजन होता है।
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नगर में जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत
गौड़िया मठ से शुरु हुई यात्रा का विभिन्न स्थानों पर सामाजिक संस्थाओं के द्वारा स्वागत किया गया। यात्रा में आगे-आगे श्रद्धालु हरे कृष्णा-हरे रामा का उद्घोष करते हुए भक्ति रस में डूबकर नाच रहे थे। वहीं इस्कॉन की ओर से सभी श्रद्धालुओं को चरणामृत और प्रसाद वितरित किया गया।