कुरुक्षेत्र। पिछले साल आई बाढ़ से सबक लेते हुए इस बार सिंचाई विभाग कोई कोर कसर छोड़ने को तैयार नहीं है। हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं कि लोगों को पहले जैसे हालात नदी व नहरों के टूटने के चलते न झेलने पड़े। विभाग के यह प्रयास हर रोज तेज हो रहे हैं। न केवल नदी व नहरों के बांध मजबूत किए जा रहे हैं बल्कि सफाई कार्य भी तेजी से किए जाने लगे हैं। तेज बारिश के चलते किसी नहर व नदी के तटबंध न टूटे इसलिए उन्हें भी दुरुस्त करने का काम किया जा रहा है।
यहां तक कि सिंचाई विभाग ने अपना ही मिट्टी का गोदाम बनाए जाने का भी निर्णय लिया है। इस गोदाम में करीब 20 हजार क्यूबिक मीटर मिट्टी जमा की जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर यहां से मिट्टी प्रयोग में लाई जा सके। मिट्टी का यह गोदाम बनाने पर करीब 20 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
झांसा गांव स्थित अपने ही रेस्ट हाउस की खाली जमीन पर विभाग मिट्टी का यह गोदाम बना रहा है। इसमें मिट्टी जमा करने के लिए मारकंडा नदी की गांव के समीप ही खोदाई की जा रही है। माना जा रहा है कि सरकार द्वारा तय नियमों के अनुसार ही पांच से छह फीट तक गांव के आसपास करीब एक किलोमीटर दायरे तक यह खोदाई की जाएगी। इससे जहां गांव के समीप नदी में पानी बहाव ज्यादा सुचारू हो सकेगा वहीं नदी में यहां पर पानी की क्षमता भी बढ़ेगी। ऐसे में झांसा व आसपास के दर्जनोंगांवों पर बाढ़ का खतरा भी कम रहेगा।
... जब तटबंध पाटने के लिए मिट्टी न मिलने पर फूल गई थी सांसें
बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष जब मारकंडा के साथ-साथ नरवाना ब्रांच व अन्य नहरों के तटबंध टूटे तो इन्हें पाटने के लिए सिंचाई विभाग की सांसें फूल गई थी। विभाग चाहते हुए भी मिट्टी का प्रबंध नहीं कर पाया था, ताकि मिट्टी के कट्टे भरकर टूटे तटबंध भरे जा सके। जहां सभी आसपास के खेतों में धान की फसल थी तो वहीं अधिकतर खेत जलमग्न थे। ऐसे में मिट्टी के लिए सिंचाई विभाग को वन विभाग की जमीन से मिट्टी उठाने के लिए काफी परेशानी झेलनी पड़ी थी।
30 जून से पहले भर लिया जाएगा गोदाम : राहिल
विभाग के एसडीओ राहिल सैनी का कहना है कि इस बार जरूरत पड़ी तो मिट्टी की कमी नहीं रहने दी जाएगी। रेस्ट हाउस में बनाए गोदाम को भरने के लिए मशीनें व डंपर लगाए गए हैं और यह कार्य 30 जून तक पूरा कर लिया जाएगा। माइनिंग के रूप में नहीं बल्कि सरकार के नियमों को ध्यान में रखकर ही मारकंडा नदी में खोदाई कराई जा रही है। इससे नदी में पानी का बहाव भी सुचारू होगा। 20 हजार क्यूबिक मिट्टी जमा की जाएगी।