- शाहाबाद व पिहोवा में नए चेहरों पर जताया भरोसा, चारों सीटों पर कमल खिलाने की चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी की धरा एक और महाभारत के लिए तैयार है। यहां मैदान सजने लगा है तो योद्धा उतारे जाने लगे हैं। इसमें सबसे बड़ी पहल सत्तासीन भाजपा ने की है, जिसकी ओर से बुधवार देर शाम को जिले की चारों सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। इसके साथ ही जिला की लाडवा सीट सबसे हॉट बन गई है, जहां मुख्यमंत्री नायब सैनी को मैदान में उतारा गया है। वहीं थानेसर में हैट्रिक लगाने के लिए राज्यमंत्री सुभाष सुधा पर तीसरी बार भरोसा जताया है तो वहीं शाहाबाद व पिहोवा में नए चेहरों सुभाष कलसाना व कंवलजीत अजराना को मैदान में उतारा गया है। ऐसे में भाजपा के लिए हर सीट पर जीत हासिल करना प्रतिष्ठा का सवाल होगा। भाजपा द्वारा प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद दूसरी पार्टियों के नेताओं की भी धड़कनें बढ़ गईं है। हालांकि अभी किसी अन्य पार्टी ने प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं, लेकिन लोग अभी से ही चुनावी समीकरणों पर चर्चा करने में जुट गए हैं।
थानेसर विधानसभा क्षेत्र
यहां से भाजपा ने राज्यमंत्री सुभाष सुधा को तीसरी बार मैदान में उतारा है। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल व वर्तमान मुख्यमंत्री नायब सैनी के नजदीकी होने का फायदा मिला है। वे अपने पिछले 10 साल के विकास कार्यों व केंद्र एवं प्रदेश सरकार की नीतियों के सहारे चुनाव जीतने की रणनीति बना चुके हैं। बड़े पंजाबी नेता के रूप में उबरे सुभाष सुधा ने वर्ष 2019 के चुनाव में अशोक अरोड़ा को 842 वोटों से हराया था।
चार जून 1964 में जन्में एवं करीब 50 वर्षीय सुभाष सुधा ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एमए तक की पढ़ाई की और राजनीतिक जीवन कॉलेज स्तर से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साथ शुरू किया। एक छात्र नेता के रूप में कॉलेज और विश्वविद्यालय की राजनीति में आगे रहे। 1994 में नगर पालिका पार्षद का चुनाव जीता और 30 वर्ष की आयु में नगर पालिका समिति थानेसर के पहले निर्वाचित अध्यक्ष बने। 2009 में एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में विधानसभा चुनाव लड़ा और करीब 18 हजार वोट प्राप्त किए। वर्ष 2013 में वित्त आयोग (हरियाणा) के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया। स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने के बाद वे इनेलो में शामिल हो गए थे, जिसके बाद वे कांग्रेस में चले गए थे लेकिन वर्ष 2014 के चुनावों से पहले वे इनेलो छोड़ भाजपा में शामिल हो गए थे और इसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने उन्हें मैदान में उतारा था। वे विधायक बने और इसके बाद वर्ष 2019 में फिर विधायक बने तो अब तीसरी बार फिर चुनाव लड़ने का मौका मिला है।
लाडवा विधानसभा
यह सीट वर्तमान में कांग्रेस के कब्जे में है, जहां वर्ष 2019 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मेवा सिंह ने 57 हजार 665 वोट लेकर जीत दर्ज की थी। उन्होंने भाजपा के ही पूर्व विधायक डॉ पवन सैनी को हराया था। इस बार भी यहां कांग्रेस की ओर से मेवा सिंह को ही प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चा है जबकि हर किसी की निगाहें भाजपा पर टिकी थी। पिछले कुछ दिनों से मुख्यमंत्री नायब सैनी को यहां से टिकट दिए जाने की चर्चाएं चल रही थी तो बुधवार शाम को उनके नाम का ऐलान भी कर दिया गया। अब क्षेत्र के समीकरण एकाएक ही बदल गए हैं। यहां से इनेलो पहले ही वरिष्ठ नेता शेर सिंह बड़शामी को मैदान में उतार चुकी है। अब भाजपा के लिए यह सीट जीतना प्रतिष्ठा का सवाल होगी। मुख्यमंत्री नायब सैनी यहां सांसद रहते हुए पूरी तरह से सक्रिय रहे थे तो वहीं मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने इस क्षेत्र में पूरी सक्रियता दिखाई थी। बुधवार शाम को टिकट घोषित होने से पहले भी दोपहर के समय वे इसी क्षेत्र में गत दिवस हादसे में मारे गए लोगों के पीड़ित परिवारजनों के साथ दुख साझा कर रहे थे।
शाहाबाद विधानसभा
शाहाबाद विधानसभा क्षेत्र में फिलहाल जजपा के रामकरण काला विधायक है। भाजपा के प्रत्याशी बने सुभाष कलसाना के समक्ष यहां जीत दर्ज करना बड़ी चुनौती होगी। पिछले चुनाव में यहां रामकरण काला को 69233, भाजपा प्रत्याशी कृष्ण कुमार को 32106, कांग्रेस प्रत्याशी अनिल कुमार धंतौड़ी को 18844 वोट मिले थे। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सुभाष कलसाना पिछले करीब 23 वर्षों से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर कार्य कर रहे हैं। वर्ष 2001 में वे कुरुक्षेत्र नगर कार्यकारिणी सदस्य, 2002-03 कुरुक्षेत्र नगर सह मंत्री, 2004-05 में कुरुक्षेत्र में नगर मंत्री, 2005-06 में एबीवीपी के यूनिवर्सिटी/ कॉलेज इकाई के अध्यक्ष और प्रांत कार्यकारिणी सदस्य, 2006-07 में जिला संयोजक, 2007-08 में कुरुक्षेत्र विभाग सहसंयोजक के रूप में उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठी आंदोलन में काफी सक्रिय भूमिका निभाई थी। वर्ष 2008 में वे एबीवीपी की कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय इकाई में संगठन मंत्री और 2008-09 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय संयोजक बने। कलसाना को 2011-12 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, कुरुक्षेत्र का नगर अध्यक्ष नियुक्त किया गया और 2012-13 में वे एबीवीपी कुरुक्षेत्र जिला सह प्रमुख भी रहे।
पिहोवा विधानसभा क्षेत्र
यह क्षेत्र पिछले चुनाव में भाजपा के कब्जे में रहा, जहां पार्टी प्रत्याशी संदीप सिंह को 42 हजार 613 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी मनदीप सिंह चट्ठा को हराया था, जिन्हें 37 हजार 299 वोट मिले थे। संदीप सिंह खेल राज्यमंत्री भी बने, लेकिन महिला कोच के साथ छेड़छाड़ मामले में घिरे रहे। अब भाजपा ने सिख नेता एवं नए चेहरे कंवलजीत अजराना पर भरोसा जताया है। वे शिरोमणी अकाली दल की राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य से लेकर अब हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी में भी प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी राजनीतिक रही है। पिता जरनैल सिंह गांव के सरपंच से लेकर ब्लॉक व जिला परिषद सदस्य भी रहे हैं। सिख राजनीति में ही सक्रिय रहते हुए उन्होंने अपने संबंध पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल व वर्तमान मुख्यमंत्री नायब सैनी से प्रगाढ़ किए। अब देखना होगा कि उनके सहारे भाजपा का कमल दूसरी बार खिल पाएगा या नहीं।