आरडी गोयल बताते हैं कि वर्ष 1914 में षडयंत्र के केस में पांच साल के लिए अंग्रेजों ने उन्हें जेल भेज दिया। उनके दादा लाला अयोध्या दास को भी वर्ष 1921 में एक साल के लिए जेल भेज दिया गया। उन पर आरोप लगाया कि वे नॉन कॉपरेशन मूवमेंट में शामिल रहे। गोयल परिवार का आजादी के लिए जुनून यहीं नहीं थमा। आरडी गोयल के पिता लाला फग्गू राम सेवक भी अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में उतर आए। वर्ष 1930 में वे पहली बार जेल भेजे गए। इससे उनका हौसला और मजबूत हुआ। जेल से बाहर आने पर फिर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिए। वर्ष 1932 में फिर छह माह के लिए उन्हें जेल में डाल दिया गया।
वर्ष 1938 में हैदराबाद में हुए सत्याग्रह में शामिल होने पर उन्हें 18 माह और वर्ष 1941 में व्यक्तिगत आंदोलन में शामिल होने पर एक साल की फिर सजा दी गई। यहां से छूटने के बाद महात्मा गांधी के साथ अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय हो गए, जिसके चलते अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें फिर चार साल तक जेल भेज दिया।
यह लाला फग्गू राम का आजादी के प्रति अदम्य साहस था कि अंग्रेजों के बार-बार दंड देने के बाद भी वे उनका डटकर सामना करते रहे। यहां तक कि उनकी पत्नी यशोदा देवी ने भी महात्मा गांधी के साथ आंदोलन में भाग लिया। अंग्रेजों ने उन्हें भी तीन साल तक नजरबंद कर दिया था। आरडी गोयल बताते हैं कि लाला फग्गू राम के अदम्य साहस को देख राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने उन्हें सेवक की उपाधि दी थी।
लाला फग्गूराम ने कुरुक्षेत्र के गांव उमरी से पांच अप्रैल 1941 में सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था, जिसमें आसपास से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। लाला फग्गू राम ने गांव-गांव अंग्रेजी सेना में युवाओं के भर्ती न होने को लेकर आंदोलन छेड़ दिया था। इस आंदोलन से अंग्रेजों में हड़कंप मच गया था। घबराहट में लाल फग्गूराम को फिर गिरफ्तार कर एक साल के लिए जेल भेज दिया था।
देश आजाद हुआ तो परिवार के सदस्यों ने समाजसेवा का रुख कर लिया। आरडी गोयल पिछले 20 वर्षों से गो सेवा कर रहे हैं। वे गोशाला से सीधे तौर पर जुड़े हैं। वे भले ही उम्र के 76वें पड़ाव पर पहुंच चुके हैं, लेकिन गोशालाओं में चारा भेजना कभी नहीं भूलते। वे बचपन से ही गो सेवा से जुड़े रहे हैं। साथ ही लंबे समय तक पत्रकारिता जगत से भी जुड़े रहे।