हरियाणा के कुरुक्षेत्र में सन्निहित सरोवर के जल का पीएच मान बढ़ना ही मछलियों की मौत का कारण बना। सरोवर के जल का पीएच मान (हाइड्रोजन सांद्रता) इतना बढ़ गया कि मछलियां सहन नहीं कर पाई। यह खुलासा मत्स्य विभाग की रिपोर्ट में हुआ है। हालांकि मछलियां मरने के बाद कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (केडीबी) के सफाई कर्मियों ने उन मछलियों को बाहर निकालकर मिट्टी में गड्ढा खोदकर दबा दिया था।
मत्स्य विभाग की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि सरोवर के जल का पीएच मान सामान्य से 2.5 ज्यादा बढ़ गया। यह स्तर न केवल मछलियों बल्कि मनुष्य के लिए भी खतरनाक है। इस स्तर को मछलियां झेल नहीं पाई और बेमौत काल का निवाला बन गई।
विदित हो इस सप्ताह सोमवार और मंगलवार को सन्निहित सरोवर में हजारों मछलियों की मौत हो गई थी। इस घटना की वजह जानने के लिए केडीबी प्रशासन ने सरोवर के जल की जांच के सैंपल भेजे मत्स्य विभाग को भेजे थे। विभाग ने सैंपल की जांच करके रिपोर्ट केडीबी को भेजी है।
वहीं सरोवर के जल का पीएच बढ़ने के पीछे केडीबी प्रशासन की लापरवाही भी मानी जा रही है। घटना से कुछ दिन पहले ही केडीबी प्रशासन ने घाटों की सफाई के लिए सरोवर से जल निकाला था। सरोवर के भीतरी भाग में पानी शेष रह गया था, जिस वजह से सरोवर का पीएच तेजी बढ़ गया। इस कारण दो दिन लगातार मछलियों की मौत होती रही।
हालांकि परिस्थिति को देखते हुए केडीबी ने सरोवर में ताजा जल भरने की व्यवस्था कर दी। साथ ही सरोवर के जल में चूना और अन्य दवा का छिड़काव किया गया, जिससे मछलियों की मौत का सिलसिला थम गया।
सन्निहित सरोवर में गोल्ड फिश, रोहू और मिरगल किस्म की मछलियां है। इन नस्ल की मछलियां शाकाहारी होती है। यह जल में डाली जाने वाली सामग्री को आहार के रूप में इस्तेमाल करती हैं, मगर सन्निहित सरोवर में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु पिंडदान, गति कर्म और अपने पितरों की आत्मिक शांति के लिए पूजा अर्चना करने आते हैं। इसके अलावा अमावस्या पर श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में होती है। उनके द्वारा सरोवर में कई तरह की सामग्री डाली जाती है। इस स्थिति में जल का पीएच बढ़ा तो फिर घटना हो सकती है।
पीएच बढ़ने से हुई मौत : ठकराल
जिला मत्स्य अधिकारी सुरेंद्र ठकराल ने बताया कि पानी का पीएच मान सात और साढ़े सात तक ठीक है। इसके ऊपर यह बढ़ा तो मनुष्य और मछलियों के लिए घातक सिद्ध होगा। सरोवर की मछलियों के साथ भी यही हुआ, क्योंकि जल का पीएच मान सामान्य से बढ़कर 10 तक पहुंच गया था। इस रिपोर्ट को केडीबी के पास भेज दिया है।
सफाई के लिए कम किया था जलस्तर : सिंघल
केडीबी के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल का कहना है सरोवर के घाट की सफाई के लिए जलस्तर कम किया गया था। उस दिन गर्मी भी ज्यादा थी तो एक दिन पहले अमावस्या के चलते श्रद्धालुओं की भीड़ भी यहां जुटी थी। ऐसे कई कारणों के चलते मछलियों की मौत हुई थी, लेकिन मृत मछलियों को निकालकर घाट की सफाई के साथ-साथ ताजा पानी भी भरा गया।