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अंधकार से प्रकाश हमारी अनादि परंपरा

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कुरुक्षेत्र। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि अन्धकार से प्रकाश की ओर हमारी वैदिक सनातन भारतीय परम्परा है, जो अनादि काल से चल रही है। वेद ग्रंथों में वर्णित यह सर्वोत्तम प्रार्थना भी मानी गई है। तमसो मा ज्योतिर्गम्य! उदय होते सूर्य को प्रणाम भी हम इसलिए करते हैं क्योंकि रात्रि के अंधकार को समाप्त करके वह हमें नई रोशनी से साक्षात् करवाता है और तो और संध्याकाल में दीया जलाकर अथवा बिजली का प्रकाश करते ही हाथ जोड़ते हैं। सिर झुकाते हैं इसलिए क्योंकि रात्रि में होने वाले अंधकार से पूर्व ही वह घर या प्रतिष्ठान में प्रकाश का वातावरण बना देती है। स्वामी ज्ञानानंद ने यह भी कहा कि वैचारिक दृष्टि से देखें तो अज्ञात अंधकार है ज्ञान प्रकाश। दु:ख-शोक-भय हमें अंधकार जैसे ही लगते हैं तथा सुख-शांति-समृद्धि प्रकाश की तरह। इसी संदर्भ में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आह्वान 5 अप्रैल दिन रविवार रात्रि 9 बजे 9 मिनट के लिए सब विद्युत उपकरण बंद करके जहां आप हैं, वहां की दहलीज या बालकानी में दीया या मोमबत्ती जलाएं, यह सुविधा न होने पर टार्च या मोबाइल से फ्लेश लाईट वह वास्तव में बहुत प्रेरक और वर्तमान के लिए महत्वपूर्ण है। वर्तमान में जो भारत और पूरे विश्व में कोरोना भय का काला साया अंधकार की तरह व्याप्त है, बढ़ रहा है। करोड़ों लोगों द्वारा जलाए गए दीप से भविष्य की प्रकाश मयी आशा का रुप लेगा, ऐसा विश्वास है। भगवान श्री कृष्ण ने भी गीता जी के 10वें अध्याय के 11वें श्लोक में संकेत किया है कि मैं अनुग्रह करके जब ज्ञान का दीप जलाता हूं तो वह अज्ञानता के सम्पूर्ण अंधकार को हर लेता है। सर्वशक्ति मान परमेश्वर से प्रार्थना करें कि शीघ्र ही मेरे देश और पूरे विश्व, पूरी मानवता पर छाया यह अंधकार फिर से नई रोशनी-नए प्रकाश में बदले। 9 बजे 9 ही मिनट इसलिए क्योंकि 9 अपने आप में पूर्णांक है। 9 को कितने से कितनी बार गुणा करें, रहेगा 9 ही। आओ सहयोगी बने। 4 केयूके 40 स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज।
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