कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र और पर्यावरण अध्ययन संस्थान ने दो सप्ताह का रिफ्रेशर पाठ्यक्रम आयोजित किया। इसके दूसरे दिन पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। कार्यक्रम में भूकंप से बचाव, ठोस कचरा प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और नाभिकीय तकनीक के उपयोग पर चर्चा हुई। प्रो. वी के गर्ग ने कृषि, चिकित्सा और उद्योग में नाभिकीय प्रौद्योगिकी के सकारात्मक उपयोग बताए। उन्होंने कहा कि यह सतत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। प्रो. दिनेश कुमार ने भूकंप जोखिम कम करने के लिए मजबूत ढांचे और जनजागरूकता पर जोर दिया। प्रो. भूपेंद्र ने ठोस कचरे के पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक प्रबंधन को आवश्यक बताया। प्रो. डेजी बातिश ने आक्रामक पौधों को जैव विविधता के लिए खतरा बताया। उन्होंने इनके वैज्ञानिक और सतत प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया। संवाद