ज्योतिसर स्थित श्री गीता कुंज आश्रम बद्रीनारायण मंदिर में चल रहे गायत्री महायज्ञ अनुष्ठान में कान्हा जी के छठी उत्सव का आयोजन किया गया। स्वामी मुक्तानंद मौन व्रत धारण किए हुए हैं। उन्होंने लिखित में कहा कि कंस ने पूतना को आदेश दिया कि जितने भी छह दिन के बच्चे हैं, उनको मार दिया जाए। पूतना जब गोकुल पहुंची तो यशोदा ने बालकृष्ण को छिपा दिया। बालकृष्ण को छह दिन हो गए थे, लेकिन उनकी छठी नहीं हुई थी और न नामकरण हुआ था। कालांतर में यशोदा ने कान्हा के जन्म से 364 दिन बाद सप्तमी को छठी पूजन किया। तभी से श्रीकृष्ण की छठी मनाई जाने लगी। तभी से बच्चों की छठी करने की भी परंपरा पड़ी। कार्यक्रम में पंडित उमेश उपाध्याय और पंडित देवराज शास्त्री ने सुंदर भजन गाए। आचार्य योगेंद्र केष्टवाल और आचार्य द्वारिका मिश्र ने विधिवत रूप से पूजा अर्चना कराई। इस अवसर पर पानीपत से पधारे मुख्य यजमान संदीप गर्ग, पूजा गर्ग, वेद प्रकाश मित्तल, शकुंतला मित्तल, प्रियंका मित्तल, कृष्ण भंडारी, पंडित अंकित शर्मा उपस्थित रहे।