कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के दौरान ब्रह्मसरोवर तट पर कांच से बनी मूर्तियां
कुरुक्षेत्र। सातवीं पास औरंगाबाद की केसर रानी महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ दूसरों के लिए अब मिसाल बन चुकी हैं। स्वयं सहायता समूहों से महिलाओं को जोड़कर अपने बच्चों के सपनों को पंख लगाने का काम कर रही हैं। गांव की 10 महिलाओं को साथ लेकर कांच का सामान बनाना शुरू किया तो हर किसी ने सराहना की। कांच से बने सामान को देशभर में लगने वाले मेलों में बेचने के लिए भेजा तो पर्यटकों की ओर से खूब पसंद किए जाने पर मेहनत रंग लाई। अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में इन महिलाओं की कलाकारी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
ब्रह्मसरोवर तट पर महिलाओं की ओर से लगाई गई स्टॉल पर कांच से बनी मूर्तियां पर्यटकों को खूब लुभा रही हैं। महिलाओं की कारीगरी का नमूना देख हर कोई हैरान है। कांच के सामान में देवी-देवताओं, पशु-पक्षियों, कई तरह के फूलों, मंदिर की घंटियों और कांच से बने बिजली के लैंप पर्यटकों की पहली पसंद बने हुए हैं। कांच से बनी यह मूर्तियां अब तक देशभर में दिल्ली, आंध्र प्रदेश, गुवाहाटी, असम, विशाखापट्टनम, ओडिशा, गुजरात, पंजाब सहित कई अन्य राज्यों में धूम मचा चुकी हैं। महिलाओं के इस हुनर के चलते हरियाणा सरकार की ओर से पहली बार सन 2000 और दूसरी बार 2002 में स्टेट अवार्ड से सम्मानित भी किया जा चुका है।
बच्चों के सपने होने लगे साकार : राजेंद्र सिंह
शिल्पकार राजेंद्र सिंह का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के चलते परिवार के पालन पोषण और बच्चों की पढ़ाई में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पत्नी केसर रानी ने महिलाओं के साथ मिलकर स्वयं सहायता समूह बनाया और कांच से बने सामान को बेचने के लिए मेलों में उतारा तो पर्यटकों ने खूब पसंद किया। व्यापार अच्छा हुआ तो परिवार का पालन पोषण भी ठीक से होने लगा, साथ ही बच्चों की शिक्षा में सुधार होने लगा। अब स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हर महिला अपने बच्चों के सपने पूरा कर रही हैं। अब किसी भी महिला को बैंक से ऋण लेने की जरूरत नहीं रही। सभी महिलाएं आत्मनिर्भर होकर काम कर रही हैं।
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के दौरान ब्रह्मसरोवर तट पर कांच से बनी मूर्तियां