कुरुक्षेत्र। महाभारत थीम पर धर्मनगरी में स्थित देश का पहला पैनोरमा एवं विज्ञान केंद्र अब सिर्फ महाभारत पर आधारित डिजिटल गैलरी व वैज्ञानिक मॉडल्स दिखाने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि यह स्कूली बच्चों के सपनों व आइडिया को पंख भी लगाएगा। फिजिक्स, केमिस्ट्री से लेकर इलेक्ट्रोनिक्स, मैकेनिकल, कंप्यूटर व रोबोटिक्स में भी बच्चे अपनी सोच के अनुसार नई-नई खोज कर सकेंगे। बच्चों की विशेष खोज का पेटेंट भी उन्हीं के नाम पर कराया जाएगा। यहीं पर देशभर के विभिन्न आईआईटी, एनआईटी, रिसर्च एवं विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों से भी सीधे रूबरू होंगे। बच्चों को अलग-अलग क्षेत्र में ओलंपियाड के लिए तैयार किया जाएगा, ताकि वे बड़े होकर वैज्ञानिकों के रूप में देश के लिए काम कर सकें।
इसके लिए पैनोरमा में इनोवेशन हब स्थापित किया जाएगा, जिसका प्लान पैनोरमा प्रशासन ने तैयार कर लिया है और इसे मंजूरी भी मिल चुकी है। उम्मीद है कि यह ड्रीम प्रोजेक्ट अगले एक साल में बनकर तैयार होगा। यह उत्तर क्षेत्र में पहला इनोवेशन हब होगा, जो बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करेगा बल्कि उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मजबूत कर नई-नई खोज करने में सहायक होगा।
यह होगी इनोवेशन हब की खासियत
इनोवेशन हब में बच्चों को हर क्षेत्र में खोज के लिए मंच मिल सकेगा, जहां हर समय विशेष ट्रेनर के साथ-साथ ग्राउंड स्तर पर संबंधित सामग्री व टूल्स मिलेंगे। हाई स्पीड इंटरनेट, कंप्यूटर सुविधा, किताबें, मैगजीन के अलावा फिजिक्स, केमिस्ट्री, बॉयोलॉजी, मैकेनिकल, इलेक्ट्रीकल, कंप्यूटर के अलग-अलग सेक्शन होंगे। रोबोटिक्स की विशेष ट्रेनिंग होगी। हर माह दो बार देश के प्रख्यात तकनीकी संस्थानों के वैज्ञानिक, विशेषज्ञ बच्चों से फ्रेंडली माहौल में रूबरू होंगे, जो बच्चों के सपनों को पंख लगाएंगे।
बटर फ्लाई कोना बनेगा आकर्षण
पैनोरमा परिसर में बटर फ्लाई कोना बनाया जाएगा, जो बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगा। इसमें बटर फ्लाई के जीवन चक्र को जीवंत कर दिखाया जाएगा। जल्द ही बच्चों को इस कोने में बटर फ्लाई को नजदीक से जानने का मौका मिल पाएगा।
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उत्तर क्षेत्र का पहला इनोवेशन हब होगा : सोनी
कुरुक्षेत्र पैनोरमा एवं विज्ञान केंद्र के समन्वयक सुरेश कुमार सोनी का कहना है कि अगले एक वर्ष तक इनोवेशन हब स्थापित किए जाने की योजना को अमलीजामा पहनाया जा रहा है, जो उत्तर क्षेत्र का पहला हब होगा। इसमें स्कूल स्तर के बच्चों को वैज्ञानिक प्लेटफार्म मिल पाएगा। यहां बच्चे प्रैक्टिकल के साथ अपने-अपने आइडिया के अनुसार नई-नई खोज कर सकेंगे। बेहतर खोज को पेटेंट के लिए भी भेजा जाएगा और वह बच्चे के नाम से ही होगा।