हरियाणा सरकार की ओर से बनाई गई एडहॉक कमेटी ने रविवार को गुरुद्वारा छठी पातशाही पहुंचकर प्रबंधन की कमान संभाली। इस दौरान गुरुद्वारा प्रबंधन द्वारा चाबी न दिए जाने पर कहीं कटर से ताले काटने पड़े तो कहीं तोड़ने पड़े। इसके बाद नए ताले लगाकर सील लगा दी गई।
महंत करमजीत ने गुरुद्वारा प्रबंधन अपने हाथ में लेने के साथ ही सभी कार्यरत कर्मियों को आश्वस्त किया कि उन्हें हटाया नहीं जाएगा बल्कि उनकी और संगत की बेहतरी के लिए कार्य किया जाएगा। पूरी कार्रवाई ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार अभिमन्यु की मौजूदगी में की गई। विरोध की आशंका को देखते हुए सुरक्षा के मद्देनजर मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस तैनात रही।
दोपहर बाद करीब तीन बजे महंत करमजीत सिंह अन्य सदस्यों के साथ गुरुद्वारा पहुंचे, जहां सबसे पहले उन्होंने दरबार साहिब में अरदास की। इसके बाद वहां बैठी संगत के बीच माइक से गुरुद्वारा प्रबंधन की कमान संभालने का एलान किया। इसके बाद महंत ने गुरुद्वारा के मैनेजर अमरीक सिंह से बातचीत की। साथ ही एडहॉक कमेटी के अधीन काम करने को कहा।
इस पर मैनेजर ने कुछ समय देने की मांग की। जब मैनेजर की ओर से दरबार साहिब में रखे गोलक की चाबी नहीं सौंपी गई तो कमेटी ने कटर से ताले कटवाकर नए लगाए और उस पर सील लगा दी। इसके बाद कमेटी सिख मिशन गुरुद्वारा पहुंची, जहां एसजीपीसी के सब ऑफिस पर भी ताला लगा मिला, इसे भी कटर से काटा गया। इस दौरान कटर की बैटरी खत्म हुई तो इसे सरिये से भी तोड़ा गया। इसके बाद हरियाणा सिख मिशन के कार्यालय की प्रबंधन ने चाबी सौंप दी, लेकिन कमेटी ने बाद में यहां भी शीशे का गेट होने के बावजूद अपना ताला लगवाया।
करमजीत बोले- सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिए हैं, झींडा को नहीं
प्रबंधन संभालने के दौरान महंत करमजीत सिंह ने मैनेजर कार्यालय में पत्रकारों से भी चर्चा की। उन्होंने जगदीश सिंह झींडा द्वारा विरोध का एलान करने पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को गुरुद्वारों के प्रबंधन के आदेश दिए हैं। ये आदेश झींडा के लिए नहीं बल्कि सरकार द्वारा बनाई गई एडहॉक कमेटी के लिए है। कमेटी ने कानूनी दायरे में रहकर आज प्रबंधन संभाला है। उन्होंने झींडा के साथ ही बलजीत सिंह दादूवाल और दीदार सिंह नलवी से भी सिखों की भलाई के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वे आगे चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं हैं, बल्कि चुनाव कराए जाने तक एडहॉक कमेटी के तौर पर गुरुघरों का सही प्रबंधन करना चाहते हैं।
उन्होंने एसजीपीसी को भी निशाने पर लिया। कहा कि जब दोनों प्रदेश अलग हुए थे तो उस समय समझौता हुआ था कि हरियाणा के गुरुद्वारों का अलग प्रबंधन हो सकता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद हरियाणा के सिखों को एसजीपीसी उनका हक नहीं देना चाहती। उन्होंने कहा कि अभी तक पांच से छह गुरुद्वारों का प्रबंधन ले लिया गया है और जल्द ही प्रदेश के सभी 52 गुरुद्वारों का प्रबंधन संभाल लिया जाएगा। जरूरत पड़ी तो कानून का सहारा भी लिया जाएगा।
नहीं हटाएंगे कर्मचारी, खोलेंगे डिस्पेंसरी
महंत करमजीत ने एलान किया है कि गुरुद्वारे से किसी भी कर्मचारी को हटाया नहीं जाएगा। उनके लिए बेहतर कार्य किया जाएगा। उनके बच्चों को शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उनके लिए कोचिंग की भी व्यवस्था की जाएगी। गुरुद्वारों में डिस्पेंसरी व लैब खोली जाएंगी, जहां न्यूनतम कीमत पर सेवाएं मिल सकेंगी।
तमाम इंतजाम पर प्रशासन की तीन घंटे तक फूलती रही सांस
गुरुद्वारा छठी पातशाही में प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई एडहॉक कमेटी द्वारा प्रबंधन संभाले जाने के दौरान हालांकि कोई विरोध नहीं हुआ, लेकिन प्रशासन को टकराव होने की आशंका थी। इसके चलते सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुख्ता बंदोबस्त किए गए। प्रबंधन संभाले जाने के दौरान प्रशासन की सांसें फूलती रही, हालांकि गुरुद्वारे के आसपास नाकेबंदी भी की गई थी। जब पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण रही और कमेटी के प्रधान व अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य करीब तीन घंटे बाद लौट गए तो प्रशासन ने राहत की सांस ली।
बता दें कि एक दिन पहले शनिवार को ही सिख नेता जगदीश सिंह झींडा ने ऐलान किया था कि वे गुरुघरों पर कमेटी द्वारा प्रबंधन लेने का कड़ा विरोध करेंगे। उन्होंने गुरुद्वारा छठी पातशाही में ही पत्रकारवार्ता कर आरोप लगाए थे कि सरकार द्वारा बनाई एडहॉक कमेटी जबरन गुरुद्वारों पर कब्जा करने में लगी है। पहले नाडा साहिब फिर अंबाला में भी प्रयास किया, लेकिन वे ऐसा किसी भी स्तर पर नहीं होने देंगे। झींडा के इस ऐलान को लेकर प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट रहा। ड्यूटी मजिस्ट्रेट अभिमन्यु ने कहा कि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से हुई है।
पुलिस बल के साथ खुफिया एजेंसी भी रही सतर्क
महंत करमजीत सिंह व उनके साथ आए पदाधिकारी एवं सदस्य करीब तीन घंटे तक गुरुद्वारे में रहे। इस दौरान पुलिस बल तैनात रहा तो गुरुद्वारे के आसपास नाकेबंदी भी की गई। प्रबंधन संभाले जाने की कार्रवाई के दौरान नायब तहसीलदार अभिमन्यु बतौर ड्यूटी मजिस्ट्रेट रहे।
कमेटी के ये पदाधिकारी व सदस्य रहे मौजूद
कमेटी के प्रधान महंत करमजीत सिंह के अलावा उनके साथ वरिष्ठ उपप्रधान भूपेंद्र सिंह, महासचिव गुरविंद्र सिंह धमीजा, सुखविंद्र सहगल, जसवंत सिंह, गुरबख्श सिंह, टीपी सिंह, सुखजिंद्र सिंह, विनर सिंह, सुदर्शन सिंह, कंवलजीत सिंह अजराना सहित अन्य पदाधिकारी, सदस्य एवं संगत मौजूद रही।
... जब कटर दे गया जवाब
कमेटी अपनी पूरी तैयारी के साथ गुरुद्वारा पहुंची थी। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि कटर, ताले व सील करने का सामान भी टीम साथ लेकर गई थी। दरबार साहिब में रखे गोलक में लगे ताले जब काटे जाने लगे तो बीच में ही कटर जवाब दे गया। कड़ी मशक्कत के बाद इसे फिर से चलाया गया। इसके चलते गोलक के दोनों ताले काटने व नए ताले लगाकर सील लगाए जाने में काफी समय लगा। ऐसी ही स्थिति का सामना उस समय भी करना पड़ा, जब कमेटी सिख मिशन संस्थान पहुंची, जहां पर हरियाणा सिख मिशन के मैनेजर कार्यालय पर ताले लगे मिले।
पहले सब ऑफिस का ताला कटर से काटा जाने लगा तो इस समय भी कटर बीच में ही जवाब दे गया। बैटरी खत्म हुई तो ईंट से ताला तोड़ने का प्रयास किया गया, इसके बाद फिर कटर चलाकर ताला काटा गया। वहीं सिख मिशन के मैनेजर कार्यालय पर लगे शीशे के गेट पर भी ताला लगा था, जहां की चाबी प्रबंधन द्वारा दे दी गई, लेकिन बाद में यहां भी दूसरा ताला लगाया गया।