त्योहारों में होली का अपना अलग ही महत्व है। इस दिन सुख शांति समृद्धि व संतान प्राप्ति के लिए महिलाएं होलिका दहन करके पूजा करती हैं।
लक्ष्मी नारायण मंदिर के संत हरिनारायण पुरी ने बताया कि होली दहन के लिए सूखी लकड़ियां, उपले और कांटेदार झाड़ियों का प्रयोग किया जाता है। महिलाएं अपने बच्चों की लंबी आयु के लिए पूजा अर्चना करती है, इसलिए होलिका दहन मनाती है। हिंदू ग्रंथों के अनुसार सूर्य अस्त के बाद ही होलिका दहन किया जाता है। उन्होंने बताया कि पूर्णिमा तिथि प्रबल होने के कारण भद्रा प्रबल होने पर शुभ कार्य नहीं होना चाहिए। होलिका दहन 12 मार्च को किया जाएगा। इसके लिए शुभ मुहूर्त शाम 6.23 से रात 8.23 तक रहेगा। भद्रा पक्ष का समय सुबह 4.11 से सुबह 5.23 तक रहेगा। भद्रा मुखा का समय 5.23 सुबह से 7.23 सुबह तक रहेगा।