कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हॉकी खिलाड़ियों की कई वर्षों से हॉकी एस्ट्रोटर्फ की मांग जल्द पूरी होने जा रही है। अगले पांच माह में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के खेल मैदान में हॉकी का अंतरराष्ट्रीय स्तर का एस्ट्रोटर्फ बनकर तैयार हो जाएगा। एस्ट्रोटर्फ का 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और बाकी का कार्य निरंतर चल रहा है। टर्फ का बैड रोल तैयार हो चुका है अब इस पर रबड़ की पर्त बिछाई जाएगी, जिसके बाद बेल्जियम से लाए गए टर्फ को बिछाया जाएगा। इसमें फ्लड लाइटें भी लगेंगी और दर्शक दीर्घा बनाई जाएगी ताकि दर्शक भी सुविधापूर्वक मैच का लुत्फ उठा सकें।
कड़े प्रयास के बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में खेल मैदान में साढ़े पांच करोड़ रुपये की लागत से यह हॉकी एस्ट्रोटर्फ तैयार किया जा रहा है, जो जिले का दूसरा व थानेसर का पहला एस्ट्रोटर्फ होगा। थानेसर में हाकी एस्ट्रोटर्फ न होने के कारण कुवि को हाॅकी के अंतर विश्वविद्यालय मुकाबले शाहाबाद स्टेडियम में करवाने पड़ते थे। जहां खिलाड़ियों के लिए भी आने-जाने की परेशानी होती थी। अब कुवि खेल मैदान ही एस्ट्रोटर्फ तैयार होने पर खिलाड़ियों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा और अभ्यास करने वाले खिलाड़ी भी नियमित अभ्यास कर सकेंगे।
वर्ष 2019 में कुवि को मिला था प्रोजेक्ट, अब सिरे चढ़ने की उम्मीद
युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की ओर से खेलो इंडिया स्कीम-स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के तहत साढ़े पांच करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया था। कुवि को ये प्रोजेक्ट 2019 में मिला था। 2020 में अनुदान मिला था लेकिन उसके बाद कोरोना के चलते इसका कार्य लटका रहा। इसके बाद 28 दिसंबर 2021 में प्रदेश के खेलमंत्री संदीप सिंह द्वारा शिलान्यास किया गया था, जिसमें मुख्यमंत्री नायब सैनी व राज्यमंत्री सुभाष सुधा भी शामिल रहे थे। एस्ट्रोटर्फ तैयार करने वाली फर्म को आधी पेमेंट जारी होने के बाद निर्माण कार्य ने रफ्तार पकड़ी है। एस्ट्रोटर्फ से विवि के साथ-साथ साई के खिलाड़ियों को फ्री सुविधा मिलेगी। ट्रायल और कैंप भी निशुल्क लगाए जाएंगे। इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन (एफआईएच) द्वारा मान्यता प्राप्त ये टर्फ जल्द तैयार होगा ।
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पांच से छह माह में तैयार होगा हॉकी एस्ट्रोटर्फ : प्रो. सोमनाथ
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा का कहना है कि खिलाड़ियों की लंबे समय की मांग पांच से छह माह तक पूरी हो जाएगी। अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर तैयार किया जा रहा एस्ट्रोटर्फ साढ़े पांच करोड़ की लागत से तैयार होगा, जिसमें विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय टर्फ जैसी सभी सुविधाएं मुहैया होंगी।
घास पर दौड़ने में होती है परेशानी : साहिल
हॉकी खिलाड़ी साहिल का कहना है कि अभ्यास के दौरान घास पर दौड़ने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। क्योंकि इससे खिलाड़ियों के दौड़ने की वह गति नहीं बन पाती जो गति एस्ट्रोटर्फ पर बन पाती है। वह एस्ट्रोटर्फ के तैयार होने के इंतजार में हैं कि उन्हें अभ्यास करने में सुविधा मिलेगी।
प्रतियोगिताओं में नहीं हो पाता अच्छा प्रदर्शन : हितेष
खिलाड़ी हितेष का कहना है कि इंटर यूनिवर्सिटी, नेशनल व इंटरनेशनल हॉकी प्रतियोगिता एस्ट्रोटर्फ पर आयोजित कराई जाती है लेकिन विश्वविद्यालय के मैदान में अभ्यास करने वाले खिलाड़ी इन प्रतियोगिताओं में एस्ट्रोटर्फ पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते। क्योंकि एस्ट्रोटर्फ पर खेलने का अभ्यास नहीं होता, जिस कारण कई बार निराशा झेलनी पड़ती है।