संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। ऐतिहासिक गांव अभिमन्युपुर में दो सितंबर को सूर्यकुंड मेले का आयोजन होगा, जिसमें दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सूर्यकुंड तीर्थ में स्नान कर दान-पुण्य करेंगे। मेले के चलते सांग महोत्सव का भी आयोजन किया जाएगा, जो वीरवार से दो दिन जारी रहेगा। मेले में दंगल का आयोजन भी होगा, जिसमें विभिन्न राज्यों के पहलवान अपना दम दिखांएगे। मेले को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई है और पूरे गांव के लोगों में उत्साह है।
मेले में दूर-दूर से श्रद्धालु यहां स्नान और दान करने के लिए पहुंचते हैं। यह परंपरा सदियों पुरानी है। आज भी लोग बड़ी श्रद्धा के साथ सूर्य कुंड मेले में आते हैं। समिति के महासचिव जसमेर सिंह के मुताबिक इस मौके पर हर साल दंगल का आयोजन होता है। इस बार दंगल दो सितंबर शाम को सुनील कुमार स्टेडियम में होगा। जिसमें हरियाणा के अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान तक के पहलवान जोर आजमाइश करेंगे।
समिति के कोषाध्यक्ष हरिचरण शर्मा का कहना है कि हरियाणवी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए मेले में 13 साल पहले हरियाणवी सांग की परंपरा भी शुरू की गई है। इस बार हरियाणा कला परिषद एवं मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर के सौजन्य से दो दिवसीय महोत्सव होगा। पहली सितंबर को दोपहर 12 बजे हरियाणवी सांग प्रारंभ होगा, जबकि 2 सितंबर को सुबह 11 बजे सांग आयोजित होगा। हरियाणा कला परिषद के निदेशक संजय भसीन ने कहा कि हरियाणवी संस्कृति को संवर्धित करने के लिए हम कृतसंकल्प है।
मेले में विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा। सूर्यकुंड मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई है। इस अवसर पर समिति के सचिव मोहनलाल नागपाल, हरि सिंह पहलवान, हरिचरण शर्मा, शीशपाल गुप्ता, रघबीर सिंह, सुभाष चंद, चौधरी सूरत सिंह भगत, जसमेर सिंह व अजय चौहान समेत समिति के सभी सदस्य मौजूद रहे।
सदियों से चली आ रही मेले की परंपरा
अभिमन्युपुर स्थित अदिति वन सूर्य कुंड महाभारत की 48 कोस भूमि का प्राचीन एवं महत्वपूर्ण तीर्थ है। वामन पुराण के अनुसार इसी स्थान पर देवताओं की माता अदिति ने लंबे समय तक तपस्या की थी, जिसके फलस्वरूप उनके गर्भ से मार्तंड सूर्य ने जन्म लिया था। मार्तंड सूर्य माता अदिति और कश्यप ऋषि की सोलहवीं संतान थे। मार्तंड सूर्य का जन्म भाद्र पद के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को हुआ था। सदियों से मार्तंड सूर्य की जयंती पर अदिति वन सूर्यकुंड तीर्थ पर मेले की परंपरा चली आ रही है। किवदंतियों के अनुसार इस दिन सूर्य कुंड में स्नान करने से गर्भवती माताओं को पराक्रमी पुत्र की प्राप्ति होती है। अदिति वन सूर्यकुंड समिति के सचिव मोहनलाल नागपाल का कहना है कि सूर्यकुंड तीर्थ का पूरा दृष्टांत वामन पुराण में मिलता है। यह देव माता अदिति की तपोस्थली रही है और मार्तंड सूर्य की जन्मस्थली है। सूर्यकुंड तीर्थ पर अभी भी अदिति माता और ऋषि कश्यप की समाधि है।