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Kurukshetra News: यहां भगवान सूर्य की किरणें करती हैं श्री लक्ष्मी-नारायण का अभिषेक

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कुरुक्षेत्र। अयोध्या में वैज्ञानिक तरीके से श्री रामलला के सूर्य तिलक की तैयारी कर ली गई है। हर राम भक्त इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने को उत्सुक है, मगर धर्मनगरी के पौराणिक श्री लक्ष्मी-नारायण मंदिर में प्राकृतिक रूप से सूर्य की किरणें भगवान लक्ष्मी-नारायण के मस्तक का अभिषेक करती हैं। यहां फाल्गुन मास की पूर्णिमा को सूर्योदय के साथ ही यह मनभावन नजारा देखने को मिलता है। इसके अगले दिन यानी चैत्र मास की प्रतिपदा को सूर्य की किरणें भगवान के वक्षस्थल से होकर चरणों को शोभित करती हैं। दोनों दिन आधे घंटे तक इस अद्भुत लीला के दर्शन जा सकते हैं।
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सन्निहित सरोवर परिसर स्थित 124 फुट ऊंचे इस मंदिर की खास बात यह भी है कि इसका निर्माण चोल शैली (दक्षिण भारतीय शैली) में किया गया है। इस मंदिर से अलग विशेष यह भी है कि मंदिर के पास में ही सन्निहित पर भगवान सूर्य नारायण का मंदिर है। मंदिर में सूर्य की किरणों द्वारा भगवान का अभिषेक करने की पहेली वैज्ञानिक समझने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि इस पर कोई ज्यादा शोध भी नहीं हुए। हाल ही में मंदिर परिसर में एक प्राचीन कूप कुआं मिला है। मंदिर की ओर से इसे विष्णु कूप होने का दावा किया जा रहा है, उसमें सन्निहित सरोवर से जल आता था।
मंदिर की व्यवस्था देख रहे मुख्य पुजारी हरिनारायण गिरी ने बताया कि इस मंदिर का जीर्णोद्धार सन 1600 में हुआ था, मंदिर उससे भी पुराना है। महाभारत युद्ध की समाप्ति के पश्चात भगवान श्री कृष्ण इसी स्थान से होकर द्वारिका गए थे वहीं युद्ध से पूर्व पांडवों ने मंदिर में यहां भगवान श्री लक्ष्मी नारायण का विग्रह स्थापित कर उनकी पूजा की थी। इसका वर्णन कई पुराणों में मिलता है। पहले मंदिर के शिखर पर सोने का कलश लगा हुआ था, जिसे औरंगजेब ने लूटा लिया था। उस समय अफगानिस्तान से दिल्ली जाने का मुख्य मार्ग मंदिर के आगे से होकर जाता था। बाद में पटियाला रियासत के महाराज ने तांबे के कलश पर सोने का पानी चढ़कर मंदिर के शिखर पर स्थापित कराया था।
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शालिग्राम पर बने हुए हैं शंख और चक्र
हरिनारायण गिरी ने बताया कि वामन पुराण के अनुसार राजा कुरु ने इस पवित्र स्थल पर 400 साल तक तपस्या की थी, जिसके फलस्वरुप भगवान नारायण ने दर्शन देकर उन्हें पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया था। भगवान ने साक्षात राजा कुरु को अपना स्वरूप यानी शालिग्राम भेंट किया था। यह शालिग्राम आज भी मंदिर में स्थापित हैं। इन शालिग्राम पर प्राकृतिक रूप से शंख और चक्र विद्यमान हैं।

मंदिर परिसर में मिला कूप
बताया कि गत सप्ताह मंदिर परिसर में एक कुआं मिला है। दावा किया गया है कि यह कुआं विष्णु कूप है। तीर्थांक पुराण के अनुसार थानेश्वर में चार कूप चंद्रकूप, रुद्रकूप, विष्णुकूप और देवीकूप का वर्णन मिलता है। यहां ब्रह्मसरोवर परिसर में चंद्रकूप, जिसे द्रोपदी कूप के नाम से भी जाना जाता है। स्थाणुवेश्वर में रुद्रकूप और भद्रकाली मंदिर में देवीकूप विद्यमान है। मंदिर में मिले इस कूप को विष्णुकूप माना जा रहा है, जो करीब 100 फुट गहरा है।

रामनवमी पर नौ कन्याएं करेंगी पूजा
पुजारी हरिनारायण गिरी ने बताया कि आज रामनवमी पर सुबह हवन-यज्ञ किया जाएगा साथ ही नौ कन्याएं विष्णुकूप का पूजन करेंगी। दोपहर को मंदिर की ओर भंडारे का आयोजन किया जाएगा। सुबह से शाम तक धार्मिक कार्यक्रम होंगे।
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