संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इको क्लब की ओर से विश्वविद्यालय स्तर ‘वायु : द वाइटल लाइफ फोर्स’ विषय पर ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि स्वस्थ जीवन स्वच्छ पर्यावरण पर ही निर्भर करता है, इसलिए पर्यावरण को संतुलित एवं स्वच्छ बनाने के लिए युवा पीढ़ी को आगे आकर पर्यावरण संरक्षण में अहम योगदान देना होगा।
मुख्यातिथि केयू के पूर्व डीन लाइफ साइंस एवं जूलोजी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. रजनीश शर्मा ने कहा कि प्राण का अर्थ है जीवन शक्ति। वायु सहित पांच तत्व मुख्य तौर शरीर के विभिन्न अंगों और विभिन्न शारीरिक और सूक्ष्म गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान में जलवायु परिवर्तन और वन्यजीवों और पारिस्थितिकी तंत्र पर उनके प्रभाव के कई विवरण हैं। जैव विविधता और जलवायु एक दूसरे से जुड़े हुए हैं तथा जलवायु में होने वाले परिवर्तन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से वन्यजीवों को प्रभावित करते हैं।
कार्यक्रम के संयोजक व डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रोफेसर अनिल कुमार वशिष्ठ ने कहा कि पर्यावरण को हानिकारक रसायन से बचाने की आवश्यकता है, जिसके लिए ग्रीन केमिस्ट्री को बढ़ावा देना आज के समय की मांग है। उन्होंने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में असीमित प्रगति तथा नये आविष्कारों की स्पर्धा के कारण आज का मानव प्रकृति पर पूर्णतया विजय प्राप्त करना चाहता है। इस कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया है।
ईको क्लब की आयोजन सचिव डॉ. मीनाक्षी सुहाग ने कहा कि जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण तीनों ही हमारे स्वास्थ्य के लिए घातक हैं। इसलिए सभी प्रकार के प्रदूषण से बचने के लिए यदि थोड़ा-सा भी उचित दिशा में प्रयास करें तो हम अपना पर्यावरण बचा सकते हैं। आयोजन सह-सचिव डॉ. दीपक राय बब्बर ने कहा कि वायु जीवन में सर्वप्रथम है, क्योंकि इसके बिना धरती पर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि हमें सम्पूर्ण मानव जाति को संरक्षित करने के लिए पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेवारियों को निवर्हन बड़ी सजगता से करना होगा।
इन विषयों पर प्रतिभागियों ने दी प्रस्तुति
कॉन्फ्रेंस में प्रतिभागियों ने वायुमंडलीय विज्ञान, जलवायु परिवर्तन संकट, वायु गुणवत्ता संवर्धन, वायु भारतीय शास्त्रों में, वायु में रसायन, वायु के संबंध में जलवायु परिवर्तन, कार्बन का उत्सर्जन, डग्रीनहाउस गैसें, जैन, बुद्धिस्ट एवं वैदिक ग्रंथों के संदर्भ में वायु का धार्मिक अध्ययन, वायु का संवर्धन, पेड़ और प्रदूषण पर विचार व्यक्त किए। इसके अलावा रोग एवं वायु, वायु का ऐतिहासिक संदर्भ, आयुर्वेद एवं वायु, मानव स्वास्थ्य, वायु गुणवत्ता पर योग का प्रभाव, रेडियोधर्मी प्रदूषण, थर्मल प्रदूषण (ग्लोबल वार्मिंग से अलग), ध्वनि प्रदूषण, फसल उपज पर सापेक्ष आर्द्रता और तापमान भिन्नता का प्रभाव, बागवानी उत्पाद, संक्रमण और कीट, गुणवत्ता और फसल के अनुकूल कीट आदि विषयों पर केस स्टडी प्रस्तुत की और पोस्टर भी बनाए।