कुरुक्षेत्र। सावन के महीने में जब धरा पर हरियाली की चादर देखने को मिलती है तो प्रकृति के इस मनोरम पल का आनंद लेने के लिए महिलाएं झूले झूलती हैं। लोक गीत गाकर उत्सव मनाती हैं, इसको ही हरियाली तीज के नाम से जाना जाता है।
हरियाली तीज को लेकर देशभर में कई जगह मेले लगते हैं और माता पार्वती की सवारी धूमधाम से निकाली जाती है। सुहागन स्त्रियों के लिए हरियाली तीज के पर्व का विशेष महत्व है। सौंदर्य और प्रेम का यह उत्सव भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। हरियाली तीज का व्रत शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन रखा जाता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए इस व्रत को रखती हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन माता पार्वती और भगवान शिव की उपासना करने से विशेष लाभ मिलता है, पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने सबसे पहले इस व्रत को रखा था। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए इस व्रत को रखती है, जबकि कुंवारी कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए इस व्रत को रखती हैं।
हरियाली तीज मुहूर्त
पंचांग के अनुसार सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 18 अगस्त को रात आठ बजकर एक मिनट से शुरू होगी और तृतीया तिथि का समापन 19 अगस्त को रात 10 बजकर 19 मिनट पर होगा।