कुरुक्षेत्र। गुरु पुष्य योग में इस बार अहोई अष्टमी का व्रत होगा, जो कि बेहद खास संयोग में है। इस योग में अहोई अष्टमी का व्रत रखने से माताओं को कई गुणा फल मिलेगा। हिंदू धर्म में हर त्योहार और पर्व का अपना अलग महत्व है। कार्तिक माह में पड़ने वाला अहोई अष्टमी का व्रत बहुत अहम है। इस व्रत को माता अपने बच्चों की कुशलता के लिए रखती हैं।
अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। अबकी बार कई सालों के बाद यह व्रत गुरु पुष्य योग में आ रहा है, जिससे इसका महत्व कई गुना बढ़ गया है। अहोई अष्टमी का व्रत रखने से मां लक्ष्मी के साथ-साथ विष्णु भगवान का आशीर्वाद भी मिलेगा। वीरवार को पुष्य नक्षत्र होने के कारण गुरु पुष्य नामक महान योग है। इसलिए अहोई अष्टमी का व्रत 24 अक्तूबर, यानी की आज होगा। इस दिन आकाश में तारों व चांद को देख कर व्रत का पारण किया जाता है।
व्रत रखने से पुत्र की आयु होती है लंबी : पंडित रामराज कौशिक
ज्योतिषाचार्य पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि अहोई अष्टमी का व्रत करवा चौथ के व्रत के चार दिन के बाद आता है। इस व्रत को अहोई आठें के नाम से भी जाना जाता है। अहोई अष्टमी का व्रत उत्तर भारत में अधिक लोकप्रिय है। इस दिन माताएं अपने बच्चों के लिए व्रत करती हैं। हालांकि इस दिन निसंतान महिलाएं भी व्रत रख सकती हैं, जिससे उन्हें जल्द संतान की प्राप्ति होती है।
- पूजा के मुहूर्त का समय
- शाम पांच बजकर 42 मिनट से छह बजकर 59 मिनट तक
- तारों को देखने का समय छह बजकर छह मिनट रहेगा
अहोई अष्टमी पूजा-विधि
इस दिन महिलाएं सुबह उठकर व्रत का संकल्प लें। शाम को पूजा अर्चना शुभ मुहूर्त में ही करें। इसके पश्चात दीवार पर देवी अहोई की छवि बनाए या कैलेंडर लगाएं और माता को पूड़ी व हलवे का भोग लगाए। इसके पश्चात व्रत की कथा सुने और आकाश में तारों को देख कर व्रत का पारण करें।