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बढ़ रहा वायरस, पशुपालक चिंतित

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गोवंश का उपचार करते पशु चिकित्सक। संवाद - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। लंपी वायरस धीरे-धीरे जिले में भी पांव पसारने लगा है। लाडवा क्षेत्र में इसका सबसे ज्यादा प्रभाव देखने को मिल रहा है। यहां एक संदिग्ध गाय की मौत भी हो चुकी है। यह गाय पिछले करीब 15 दिन से इस वायरस से ग्रसित थी। आठ से दस किलो दूध देने वाली इस गाय की मौत से पशुपालक को काफी नुकसान हुआ है।
वहीं लाडवा की श्रीकृष्ण गोशाला सोसायटी में ही 120 से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं, जिनका उपचार चल रहा है। लगातार फैल रहे इस वायरस से सभी पशु पालक काफी चिंतित हैं। वहीं प्रशासन की ओर से लगातार सैंपलिंग की जा रही है और जांच के लिएसैंपल जालंधर भेजे जा रहे हैं। कई सैंपलों की रिपोर्ट सोमवार को आ सकती हैं। वायरस के कारण पशुओं के शरीर पर फोड़े हो रहे हैं, जिनके फूटने से गहरे जख्म बन रहे हैं। उधर पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने सभी पशु पालकों को अलर्ट करते हुए इस बारे में गाइडलाइन जारी की है।
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वहीं पशुपालकों के साथ-साथ गोशाला संचालकों में भी चिंता लगातार बढ़ रही है। जिले की करीब 25 गोशालाओं में 10 हजार से भी ज्यादा गोवंश हैं। इसके अलावा सड़क पर घूम रहे गोवंश की संख्या अलग है। ऐसे में गोशाला में यदि किसी गोवंश को यह वायरस चपेट में ले लेता है तो वहां क्षमता से ज्यादा गोवंश होने के कारण संक्रमित को अलग रखना मुश्किल है। श्रीकृष्ण गोशाला सोसायटी लाडवा के संचालक देसराज ने बताया कि उनकी गोशाला में 750 गोवंश है, जिसमें से 125 वायरस की चपेट में आ चुके हैं। सुबह और शाम संक्रमितों पर दवा का छिड़काव किया जा रहा है। फिलहाल स्थिति कुछ काबू में है।
पशुओं पर रखी जा रही नजर : डॉ. धर्मेंद्र
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उपनिदेशक डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि पशुपालकों को लगातार हिदायतें जारी की जा रही हैं। उनके संज्ञान में अभी तक करीब 15 केस ही आए हैं। विभाग जिले के सभी पशुओं पर निगरानी कर रहा है। पशुपालकों से कहा गया है कि किसी भी पशु में इस वायरस के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत सूचित करें और संक्रमित पशु को अन्य पशुओं से दूर ही रखें। उन्होंने बताया कि जब तक वायरस का प्रकोप है. तब तक दुधारू पशुओं का दूध उबालकर ही पियें। उबालने से दूध में सारे वायरस खत्म हो जाएंगे।
संक्रमित पशुओं का हो रहा इलाज : जितेंद्र
गोशाला एसोसिएशन के जिला प्रधान जितेंद्र पाल ने कहा कि लंपी वायरस के लाडवा में कुछ केस सामने आए हैं, पशुओं का उपचार किया जा रहा है। जिले की सभी गोशालाओं में गोवंश पर नजर रखी जा रही है। संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत सैंपल लिए जा रहे हैं। संचालकों को हिदायत दी गई है कि संदिग्ध को अन्य पशुओं से दूर रखें ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
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क्या है लंपी वायरस
लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) गोजातीय पशुओं में चमड़ी का रोग है जो लंपी स्किन डिजीज वायरस के कारण होता है। यह गोवंश और भैंसों को प्रभावित करने वाली एक संक्रामक, छूत और आर्थिक महत्व की बीमारी है। यह चमड़ी और शरीर के अन्य भागों में गांठ बनने के उपरांत फटने से बने घावों के कारण घातक भी हो सकती है।
उपचार और नियंत्रण
-एलएसडी प्रभावित किसी भी पशु में लंपी स्किन डिजीज होने पर नजदीकी पशु चिकित्सालय में इलाज कराएं।
-बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग करें और घाव के उपचार एवं मक्खियों को दूर करने के लिए स्प्रे व जीवाणु नाशक दवा लगाएं।
-यदि पशुओं को बुखार है तो बुखार ज्वरनाशक दवा दी जा सकती है।
-आहार और पानी उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
-रोग प्रभावित क्षेत्रों से पशुओं और अन्य उत्पादों को न खरीदें।
-साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें
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