कुरुक्षेत्र। गुरुद्वारा साहिब पातशाही छठी में संत बाबा शुबेग सिंह की ओर से स्वर्ण कलश सुशोभित किया गया, जिस पर संगत में खुशी जताई। कलश अर्पित करने से पहले सभी ने गुरु चरणों में अरदास की। प्रधान जत्थेदार भूपिंदर सिंह असंध ने कहा कि गुरु घर की सेवा के लिए संगत को हमेशा सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वर्ण कलश सुशोभित करने का अवसर भी संगत के सहयोग से ही हुआ है। उन्होंने गुरुद्वारा साहिबान के लिए सहयोग करने पर संगत का आभार जताया।
कार्यकारिणी समिति की सदस्य बीबी रविंदर कौर अजराना ने कहा कि बाबा शुबेग सिंह की सेवा देखकर ही संगत हमेशा उनका सहयोग करती है। प्रवक्ता कंवलजीत सिंह अजराना ने बताया कि यह सेवा बाबा शुबेग सिंह कार सेवा वालों ने की है। संगत के सहयोग से बनवाया स्वर्ण कलश शनिवार को गुरु चरणों में अरदास के बाद गुरुद्वारा साहिब के श्री दरबार साहिब के भवन के शिखर पर सुशोभित किया गया है। स्वर्ण कलश अर्पित करते समय बाबा दर्शन सिंह कार सेवा वाले,गुबखश सिंह, हरप्रीत सिंह जंगी, नरेंद्र सिंह गिल, हरियाणा कमेटी के मुख्य सचिव जसविंदर सिंह दीनपुर, अतिरिक्त सचिव राजपाल सिंह दुनियामाजरा, उपसचिव सतपाल सिंह, खेतीबाडी इंचार्ज कुलदीप सिंह भानोखेड़ी, मैनेजर जज सिंह, तजिंदर सिंह मक्कड, तजिंदरपाल सिंह स्याहपोश, रूपिंदर सिंह, बलजीत सिंह, दिलबाग सिंह, बलविंदर सिंह, जसपाल सिंह, अवतार सिंह, लखविंदर सिंह, जसवंत सिंह ग्रेटा, इकबाल सिंह, कर्मजीत सिंह सहित संगत मौजूद रही।
बीबी रविंदर कौर अजराना ने बताया कि सरबंसदानी श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादा बाबा अजीत सिंह , बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह, बाबा फतेह सिंह, माता गुजर कौर की अद्वितीय शहादत को समर्पित महान धार्मिक समागम सफर-ए-शहादत करवाया जा रहा है। इसके तहत 18 दिसंबर से 24 दिसंबर तक अलग-अलग गुरुद्वारा साहिबान में समागम करवाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 18 दिसंबर को गुरुद्वारा साहिब पातशाही नौवीं नीम साहिब कैथल, 19 दिसंबर को गुरुद्वारा साहिब पातशाही छठी कुरुक्षेत्र, 20 दिसंबर को गुरुद्वारा श्री गुरु रामदास माडल टाउन पानीपत, 21 दिसंबर को गुरुद्वारा साहिब पातशाही दसवीं सिरसा, 22 दिसंबर को गुरुद्वारा साहिब पातशाही दसवीं हनुमान गेट जगाधरी, 23 दिसंबर को गुरुद्वारा श्री शीशगंज साहिब पातशाही नौंवी तरावड़ी और 24 दिसंबर को गुरुद्वारा साहिब पातशाही आठवी पंजोखरा साहिब अंबाला में समागम करवाए जाएंगें। जिनमें पंथ के महान रागी,ढाडी व कविशरी जत्थे संगत को गुरु इतिहास से जोडेंगे।