कुरुक्षेत्र। शिक्षा और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे उड़ीसा के एक गांव ने कला के क्षेत्र में अलग पहचान बनाई है। कालाहांडी जिले में पड़ने वाले कांकेरी गांव की महिलाओं ने अपने हुनर से सभी को हैरान कर दिया है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी इन महिलाओं की कलाकारी अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी है। ब्रह्मसरोवर तट पर ढोकला कला के माध्यम से तैयार की गईं मूर्तियों की प्रदर्शनी अनायास ही पर्यटकों को अपनी ओर खींच रही है। साथ ही विषय परिस्थितियों में अपनी कला को जीवंत करने का अनुपम उदाहरण पेश कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में पहुंचे शिल्पकार बुट्टा कोनसारी का कहना है कि उनके गांव में न शिक्षा का साधन है, न ही बिजली की कोई व्यवस्था है। गांव को जाने वाला रास्ता भी काफी खराब है, लेकिन वहां की महिलाओं ने ढोकला कला से गांव को अलग पहचान दिलाई है। उनकी कला को देखकर आज हर कोई हैरान है। गांव के घरों में तैयार की जा रही पीतल की मूर्तियों को काफी पसंद किया जा रहा है। गांव में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ओर से तैयार होने वाली मूर्तियों को अब पूरे देश में लगने वाले मेलों में बिकने के लिए भेजा जा रहा है, जिसे पर्यटकों की ओर से काफी ज्यादा पसंद किया जा रहा है। अब तक इन मूर्तियों को जम्मू कश्मीर, भुवनेश्वर, पटना, रायगढ़ सहित कई अन्य जगहों पर प्रदर्शित किया गया है। इससे ढोकरी कला को न सिर्फ नई पहचान मिली है, बल्कि यह लोगों के रोजगार का प्रमुख जरिया भी बना है।
उन्होंने बताया कि आज के आधुनिक युग में भी उनके गांव में बिजली नहीं है। दीये के सहारे ही ग्रामीण जीवन यापन कर रहे हैं। प्राथमिक शिक्षा के लिए भी बच्चों को 10 किलोमीटर दूरे दूसरे गांव में जाना पड़ता है, जहां कई बार शिक्षक भी नहीं मिलते हैं। ऐसी परिस्थितियों में ग्रामीणों ने अपनी ढोकरा कला को जीवंत बनाया है।
10 महिलाओं ने शुरू किया था स्वयं सहायता समूह
ढोकरा कला को बचाने के लिए पिछले कई सालों से संघर्ष कर रही महिलाओं को महाशक्ति फाउंडेशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूह से जोड़ा गया था, जो कारगर साबित हुई। शुरुआती दौर में 10 महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह शुरू किया, जिसके अच्छे परिणाम मिले। इसके बाद अब सैकड़ों की संख्या में महिलाएं इस कला को बढ़ावा देने में लगी हैं। महिलाओं की ओर से तैयार की गई मूर्तियों को जगह-जगह खूब पसंद किया जा रहा है।
ढोकरिया कपल बनी पहली पसंद, 250 से लेकर 10 हजार तक कीमत
पीतल से तैयार की गई इन मूर्तियों में ढोकरिया कपल लोगों की पहली पसंद बन रही है। इसके अलावा अन्य आकर्षक मूर्तियां भी पर्यटकों को भा रही हैं। यह मूर्तियां 250 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये के दामों में उपलब्ध है।