इस्माईलाबाद। एक जून से सूरजमुखी की सरकारी खरीद शुरू न होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। वहीं दूसरी ओर सूरजमुखी की फसल को सरकार भावांतर योजना के अंतर्गत करने से किसानों में मायूसी छा गई है। किसान अजय कुमार, राजेश शर्मा, जगतार, निर्मल, प्रवीन आदि ने बताया कि पिछले वर्ष सरकार ने सूरजमुखी की फसल को समर्थन मूल्य पर खरीदा था।
पिछले वर्ष सूरजमुखी की फसल का समर्थन मूल्य 6015 रुपये था जबकि करीब 6200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से प्राइवेट में बिकी थी। इस वर्ष सरकार ने सूरजमुखी का समर्थन मूल्य 6400 रुपये निर्धारित किया हुआ है, लेकिन इस वर्ष प्राइवेट खरीदारी में सूरजमुखी की फसल को 4500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीद रहे है जिससे किसान को प्रति क्विंटल 2000 रुपये का नुकसान होगा। सरकार पहले तो एक जून से सूरजमुखी की फसल को खरीदने की बात कहती रही जिसके चलते किसान अपनी फसल को सुखाकर घर ले गए। जिससे किसानों पर दोहरा खर्च भी पड़ा है और अब सरकार ऐन मौके पर सूरजमुखी को भावांतर योजना में शामिल कर किसानों को 1000 हजार रुपये सीधे खाते में देने की बात कर रही है, लेकिन किसानों को सरकार की यह बात मंजूर नहीं है। सरकार सीधे तौर पर एजेंसियों के द्वारा सूरजमुखी की खरीद कराएं नहीं तो किसान बड़े आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।
सूरजमुखी के दामों में आई गिरावट : कंसल
जब सूरजमुखी के गिरते दामों के बारे में निजी खरीदार पुरुषोत्तम कंसल ने कहा कि तेल के दामों में भारी गिरावट आई है, जिसके चलते फसल के दामों में भी काफी गिरावट आ गई है। उन्होंने कहा कि भारत में बाहर से तेल आ रहा है। जिससे बाजार में तेल के दाम आधे से भी कम हो गए है। इसी कारण से सूरजमुखी के दामों में गिरावट आई है।
सरकार के आदेशानुसार की जाएगी खरीद : मैनेजर
हैफेड मैनेजर गुरदेव सिंह ने कहा कि सरकार ने सूरजमुखी की फसल को भावांतर योजना के अंतर्गत किया है, जिसमें किसान अपनी फसल को निजी तौर पर भी बेच सकता है। एजेंसी की हर तरीके से तैयारी है। सरकार के जो आदेश होंगे उसी के अनुसार खरीद की जाएगी।