हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का पहला इजलास बुधवार को कुरुक्षेत्र में अब जिला सचिवालय में हुआ। जिला उपायुक्त शांतनु शर्मा की अध्यक्षता में कमेटी के प्रधान वरिष्ठ उपप्रधान सहित पांच पदाधिकारियों का चुनाव हराया। हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान का एलान कर दिया गया है। यमुनानगर के बाबा करमजीत सिंह को प्रधान बनाया गया है। वहीं बलजीत सिंह दादूवाल इसका विरोध किया है और वह बैठक छोड़कर रवाना हो गए। उन्होंने कहा कि हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के बनाने को लेकर करमजीत सिंह ने कोई योगदान नहीं दिया है और ऐसे में उनका नेतृत्व स्वीकार नहीं किया। बैठक से पहले सदस्यों को अरदास के लिए गुरुद्वारा छठी पातशाही ले जाया गया था, जहां अरदास के बाद उन्हें वापस जिला सचिवालय लाया गया। जहां पर दोबारा बैठक में प्रधान की घोषणा की।
कुरुक्षेत्र जिला सचिवालय में हुई बैठक में हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारियों व सदस्यों की सूची भी जारी हो गई है। इसके अनुसार सीनियर उप प्रधान भूपेन्द्र सिंह , जूनियर उप प्रधान गुरमीत सिंह, महा सचिव गुरविंदर सिंह घमीजा, संयुक्त सचिव मोहन जीत सिंह पानीपत व कार्यकारिणी सदस्य रविंद्र कौर अजराना, जसवंत सिंह दुनिया माजरा, गुरबख्श सिंह यमुमानगर, रमणीक सिंह मान, जगशीर सिंह, विनर सिंह है।
वहीं हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव का पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीदार सिंह नलवी ने भी विरोध किया। 5 सदस्यों के साथ बैठक का बहिष्कार कर निकल गए। उनके साथ परमजीत सिंह सिरसा, बलदेव सिंह खालसा, गुरमीत सिंह कैथल, सुखजिंदर सिंह पंचकूला आदि बैठक का बहिष्कार कर निकले।
दीदार सिंह ने चुनाव व्यवस्था पर ही सवाल उठाया और कहा कि यह सरकार द्वारा पहले से ही तय है और चुनाव जैसी कोई प्रक्रिया ही नहीं लग रही है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद के लिए उनका नाम लिया गया और कुछ सदस्यों ने सहमति दी थी लेकिन बाद में सरकार द्वारा तैयार किए गए कार्यक्रम के अनुसार ही भूपेंद्र सिंह असंध का नाम वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद के लिए लिया गया, जो सरासर गलत था।
उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में चुनाव आयोग है तो उसकी तरफ से कोई प्रक्रिया क्यों नहीं की जा रही। यहां सिर्फ कमरे में बंद कर जबरदस्ती सहमति करवाई जा रही है, जो उन्हें स्वीकार नहीं है अब वह इस पूरी प्रक्रिया को ही कोर्ट में चैलेंज करेंगे।
मीटिंग को लेकर भारी विरोध की भी आशंका जताई जा रही थी, जिसके चलते पुलिस ने कड़े बंदोबस्त किए हुए थे। जिला सचिवालय की पार्किंग को खाली करवा दिया गया। चारों तरफ से नाकेबंदी कर दी गई। भारी पुलिस बल तैनात है तो खुफिया तंत्र भी पूरी तरह सक्रीय है।
विरोध की आशंका के चलते गुरुद्वारा छठी पातशाही पर इस तरह की गई नाकेबंदी व सुरक्षा प्रबंध।
बता दें कि इससे पहले एचएसजीपीसी के संस्थापक जगदीश सिंह झींडा समर्थकों सहित इससे पूरी तरह से अलग हो चुके हैं तो वहीं कई सिख नेता इस इजलास का विरोध करने का एलान कर चुके थे। ऐसे में पहले गुरुद्वारा छठी पातशाही में किया जाने वाला यह इजलास अब जिला सचिवालय में किया गया है, जिसके पीछे विवाद की आशंका को ही माना जा रहा था।