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Kurukshetra News: बीज नहीं मिलने पर मायूस होकर बैरंग लौटे किसान

Tue, 07 May 2024 06:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
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कुरुक्षेत्र। अभी अनाज मंडियों में गेहूं डालने से लेकर भुगतान तक की समस्याओं से किसान उभर भी नहीं पाए थे कि अब धान का बीज लेने के किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बीज लेने के लिए किसान सुबह से शाम तक लाइन में खड़े रहे। शाम को पांच बजे केंद्रों के शटर बंद होने के बाद सैंकड़ों किसान बिना बीज लिए ही बैरंग लौटने गए। यहां तक कि अब पुलिस भी तैनात की जाने लगी है। न खाद्य एवं पूर्ति विभाग गेहूं सीजन के लिए किसानों को उठान तक में राहत दे पाया और न ही अब कृषि एवं किसान कल्याण विभाग धान के बीच को लेकर समय रहते तैयारी कर सका। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। हालात यह है कि किसान अब बीज लेने के लिए अल सुबह ही घरों से निकलने को मजबूर हो रहे हैं।
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इस दौरान जहां किसानों ने अपने चहेतों को भी बीज उपलब्ध कराए जाने के आरोप लगाए तो वहीं व्यवस्था को लेकर गहरा रोष जताया। किसानों की मानें तो धान की 7501 किस्म का बीज दुकानदार अपने चहेतों को देकर कालाबाजारी कर रहे हैं और जो छोटे किसान हैं उन्हें बीज नहीं मिल रहा है। बीज लेने पहुंचे किसानों ने बताया कि एक तरफ तो धान की पौध तैयार करने का समय है। एक तरफ तो खेत तैयार कर रखे है। ताकि धान की पौध तैयार की जा सके। 42 डिग्री तक सोमवार को तापमान रहा, जिसके बीच कड़ी धूप व लू का प्रकोप भी दिन भर लाइनों में लगे किसान झेलते रहे। ऐसे में किसी किसान को एक बैग तो किसी को महज दो बैग बीज मिल पाया। अब इन किसानों को भी बाकी खेत के लिए दोबारा से ऐसे हालात से गुजरना होगा।
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फोटो: 22
नही मिल पाया बीज : अमरजीत
बचगांवा से बीज लेने पहुंचे किसान अमरजीत ने बताया कि सुबह बीज लेने के लिए पहुंचा तो सुबह के समय करीब 600 किसान बीज लेने के लिए लाइन में लगे हुए थे। करीब 200 किसानों का ही रजिस्ट्रेशन हो पाया। उनको ही बीज मिल पाया। वे चार एकड़ खेत की पौध तैयार करने के लिए बीज लेने आए थे, लेकिन पर्याप्त नहीं मिल पाया।
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किसानों के लिए प्रशासन नहीं कर पाता कोई भी व्यवस्था : विक्रम
गांव बोडला से बीज लेने पहुंचे विक्रम ने बताया कि उन्हें चार एकड़ की पौध तैयार करने के लिए बीज लेने के आया था। यहां पर प्रति किसान को सिर्फ दो ही बैग मिल रहें है। उसके लिए आधार कार्ड की फोटो प्रति जमा करवानी पड़ती है तब जाकर दो बैग बीज ही मिल रहा है। उनका कहना था कि प्रशासन किसानों के लिए कोई भी व्यव्स्था समय पर नहीं कर पाता। महज बैठक व दावों तक ही अधिकारी सिमट कर रह जाते हैं।
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