इस्माईलाबाद। अनाज मंडी में सरसों की आवक दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, लेकिन सरकारी खरीद शुरू न होने से किसानों को सरसों कम दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अनाज मंडी में करीब 400 से 5000 क्विंटल सरसों बिकवाली के लिए आ रही है, लेकिन उचित दाम न मिलने से किसानों को फसल कम दामों पर बेचनी पड़ रही है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
किसान धर्मपाल, हरपाल, कृष्ण, ओमप्रकाश ने बताया कि सरसों की फसल पक कर तैयार है और किसान अपनी फसल को बेचने के लिए अनाज मंडी में लेकर आ रहे हैं, लेकिन अनाज मंडी में सरसों की सरकारी खरीद शुरू न होने से किसानों को प्रति एकड़ आठ से 10 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है।
किसानों ने बताया कि सरकार ने सरसों का समर्थन मूल्य 5650 रुपये तय किया हुआ है, लेकिन अनाज मंडी में एजेंसियों को खरीद के आदेश नहीं दिए हैं, जिसके चलते उन्हें मजबूर होकर प्राइवेट खरीदार को सरसों 4500 से 5000 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचनी पड़ रही है। सरकार समर्थन मूल्य तो तय कर देती हैं, लेकिन फसल की खरीद के समय एजेंसियों को खरीद के आदेश नहीं देती, जिसके चलते खरीद शुरू नहीं हो पाती और किसानों को अपनी फसल कम दामों पर बेचने पर मजबूर होना पड़ता है। किसानों ने सरकार से मांग रखी है कि जल्द से जल्द सरसों की सरकारी खरीद शुरु की जाए, ताकि किसानों को फसल का सही दाम प्राप्त हो सके।
क्या कहते प्राइवेट खरीदार
अनाज मंडी के प्रधान टोनी कंसल और सरसों के प्राइवेट खरीदार पुरुषोत्तम कंसल ने बताया कि सरसों का दाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल के दामों पर निर्भर करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल के दामों में भारी गिरावट है, जिसके चलते सरसों के दामों में भी गिरावट है। व्यापारी केवल मार्केट के भाव के अनुसार ही किसान से सरसों खरीद रहा है।
जल्द शुरू होगी सरसों की फसल की खरीद : अंकुर ठुकराल
मार्केट कमेटी सचिव अंकुर ठुकराल ने कहा कि जिला स्तर पर अधिकारियों के साथ सरसों खरीद को लेकर बैठक हुई हैं, जिसमें 26 मार्च से सरसों की खरीद शुरू करने का फैसला लिया गया है। मंडी से सरसों खरीद का जिम्मा हैफड एजेंसी को दिया गया है और जिन किसानों ने सरसों का पंजीकरण करवाया हुआ है, उन किसानों की फसल की खरीद जल्द शुरू कर दी जाएगी।