एनआरआई के कागजात पर 60 लोगों की ऑस्ट्रेलिया में स्पॉन्सरशिप फाइल लगाने के आरोप में पुलिस ने तीन एजेंट के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। एंबेसी ने ऑस्ट्रेलिया में रह रहे युवक से मामले के बारे में पूछताछ की तो पूरा भेद खुल गया। पुलिस जांच में सामने आया कि इन एजेंट की बजाय आईलेट्स सेंटर चलाने वाले एक युवक ने फर्जी कागजात तैयार कर इस मामले को अंजाम दिया। पुलिस ने आरोपी सिकंदर पाल निवासी ठसका मीरांजी को गिरफ्तार कर लिया है।
आईलेट्स सेंटर संचालक गिरफ्तार, आरोपी ने तैयार करके भेजी थी फाइलें
कश्मीर सिंह निवासी नलवी ने पुलिस में दर्ज शिकायत में आरोप लगाते हुए बताया कि वह अपने बेटे रणजोध सिंह को टूरिस्ट वीजा पर आस्ट्रेलिया भेजना चाहता था। इसके लिए वह एजेंट गुरविंद्र सिंह, रघुवीर सिंह व शक्ति सिंह से मिला था। गुरविंद्र सिंह ने पांच मार्च 2022 को उसके साले से ऑस्ट्रेलिया से स्पॉन्सरशिप के लिए बच्चे, पत्नी सहित पासपोर्ट व अन्य कागजात व्हाट्सएप से मंगाए थे। उसके बाद एजेंटों ने उसके बेटे की फाइल ऑस्ट्रेलिया एंबेसी में 29 मार्च 2022 को जमा कराई थी, जिस पर 15 जून 2022 को रिफ्यूजल आ गई।
रिफ्यूजल आने के बाद वह एजेंटों से मिला और साले के सभी कागजात उनके कंप्यूटर व फोन से डिलीट करने को कहा था। गुरविंद्र सिंह ने सभी कागजात डिलीट और दुरुपयोग नहीं करने का आश्वासन दिया था। एक साल बाद 22 फरवरी को उसके साले ने उसे सूचना दी कि उसके कागजात का दुरुपयोग करके करीब 60 लोगों की फाइल स्पॉन्सरशिप के लिए लगाई गई है। इसकी जानकारी उसे ऑस्ट्रेलिया एंबेसी से मिली है। शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।
आरोपी आईलेट्स सेंटर संचालक गिरफ्तार
जांच अधिकारी एसआई नरेश पाल ने बताया कि साइबर सेल से प्राप्त मिले रिकॉर्ड और अंकुश निवासी गांव मडाडो ने पूछताछ में पता चला कि शक्ति, गुरविंद्र सिंह व रघुवीर सिंह ने कोई धोखाधड़ी नहीं की है, बल्कि आईलेट्स सेंटर चलाने वाले सिकंदर पाल ने लैपटॉप पर फर्जी कागजात तैयार कर उसके पिता हरनेक सिंह व अन्य लोगों को टूरिस्ट वीजा की फाइल भेजी थी। पुलिस ने सिकंदर पाल को गिरफ्तार कर लिया गया है।