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ईश्वर का ध्यान लगाने पर टल जाता है बड़े से बड़ा संकट : शास्त्री

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कुरुक्षेत्र। गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित आरके एन्क्लेव पटियाला बैंक कॉलोनी में भागवत प्रवक्ता अनिल शास्त्री ने कथा में कहा कि मनुष्य चाहता है कि हमारे सभी इच्छाएं पूर्ण हो लेकिन संसार के किसी भी प्राणी की सभी इच्छा कभी पूरी नहीं हुई है। एक इच्छा की पूर्ति होने के बाद स्वतः दूसरी इच्छा खड़ी हो जाती है। और यही दुख का कारण है। कथा में मुख्य अतिथि थानेसर विधायक एवं पूर्व मंत्री अशोक अरोड़ा ने दीप प्रज्वलित किया।उन्होंने कहा कि समाज परिवार में भाई चारा हमेशा होना चाहिए। अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए महा पुरूषों के बताए हुए रास्ते पर चलने का प्रयास करना चाहिए। गीता एवं भागवत की सुनने कथा से मनुष्य की दिशा एवं दशा बदल जाती हैं। उन्होंने कहा कि समय समय पर भागवत कथा का आयोजन होते रहना चाहिए। जिससे कि हमारा सामाजिक प्रेम बना रहता हैं। कथा की वृद्धि करते हुए कथावाचक अनिल शास्त्री ने कहा कि जब तक इच्छाओं का दमन नहीं होगा तब तक हम परमात्मा की और अग्रसर नहीं हो सकते। कथा में शास्त्री ने कहां के जितना सांसारिक चीजों में मोह माया बढ़ता जाएगा, उतना ही हम परमात्मा से दूर होते चले जाएंगे। अत: जीवन में परमात्मा प्राप्ति की इच्छा करने वाले लोगों को पहले अपनी इच्छाओं का दमन करना चाहिए। और मनुष्य को अपने इंद्रिय को बस में रखना चाहिए। शास्त्री ने कहा कि अगर मनुष्य को अपने अंदर कुछ विशेषता दिख रही है तो समझिए यह शरणागति और ईश्वर की प्राप्ति में बाधक है। जब तक मनुष्य को अपने बल का अभिमान रहता है तब तक वह भगवान के शरण में नहीं आ सकता। ईश्वर के शरणागति होने पर मनुष्य सदा के लिए निर्भय हो जाता है। ईश्वर का ध्यान लगाने पर बड़े से बड़ा संकट टल जाता है।
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