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Kurukshetra News: आठ साल बाद भी प्रशासन पूरी तरह से लागू नहीं करवा पाया सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी

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कुरुक्षेत्र। राजीव प्रसाद।
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कुरुक्षेत्र। महेंद्रगढ़ के कनीना में हुए बस हादसे को लेकर प्रशासन स्कूल बसों के निरीक्षण में जुटा हुआ है और जिलेभर की बसों का डाटा जुटाने में लगा है। हकीकत यह है कि सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी 2015 से चलन में है, लेकिन करीब आठ साल बीत जाने के बाद भी प्रशासन इसे पूरी तरह लागू नहीं करवा पा रहा है।
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सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी लागू कराने को लेकर कोई भी विभाग सीधे तौर पर जिम्मेदारी लेने को भी तैयार नहीं है और सभी इसमें खामियों का ठीकरा एक-दूसरे पर फोड़ रहे हैं। शिक्षा विभाग स्कूली बसों का जिम्मेदार आरटीए विभाग को ठहराता है तो वहीं आरटीए विभाग भी अपनी जिम्मेदारी सड़क पर चलते वाहनों तक ही मान रहा है तो वहीं दावा है कि इसके बाद जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होती है। इसी बीच यातायात पुलिस को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। विभागों में इस आपसी तालमेल के अभाव में नियमों को पूरा किए बिना ये बसें सरपट दौड़ाई जा रही हैं हालांकि अभी भी नियमों का पालन न होने की स्थिति में बसों को जब्त किया जा रहा है। इसके बावजूद भी बसें नियमों को ताक पर रख सड़कों पर दौड़ती देखी जा सकती है।


पॉलिसी के अनुसार इन नियमों का पालन जरूरी
स्कूल बसों के संचालन के लिए नियमों की बात करें तो स्कूल वाहनों के ड्राइवर के पास पांच वर्ष के अनुभव के साथ वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए, स्कूल बस और वाहन का रंग पीला होगा, वैध कंडक्टर-एटेंडेंट लाइसेंस, चालक व परिचालक की नेम प्लेट लाइसेंस नंबर के साथ उनकी वर्दी पर होनी चाहिए, चालक और कंडक्टर वर्दी में हो, वाहनों का रजिस्ट्रेशन व फिटनेस प्रमाणपत्र, इंश्योरेंस सर्टिफिकेट, पॉल्यूशन, जीपीएस सिस्टम, वर्किंग हाॅर्न, इमरजेंसी ब्रेक और ब्रेक वर्किंग, हेडलाइट, बैकलाइट, वाइपर, रूट परमिट की अनुमति, स्पीड गवर्नर व जीपीएस लगा हो और ठीक से कार्य कर रहा हो। बस 30 किमी. की स्पीड से ज्यादा नहीं चलेगी। स्कूल परिसर के भीतर बच्चे उतारे जाएंगे और वहीं से सवार होंगे। अग्निशमन यंत्र लगा हो, वाहनों के हॉर्न चालू हालत में हों, बसों के आगे व पीछे रिफलेक्टर व रिफलेक्टिव टेप लगी हुई हो, दवाइयों की समाप्ति तिथि चैक किया हुआ फर्स्ट एड बॉक्स लगा हो, वाहनों पर रूट बोर्ड तथा समय सारिणी डिसप्ले हो, पुलिस चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर, कंट्रोल रूम नंबर, वाहन मालिक का नंबर अंदर व बाहर दर्शाए गए हों, कैमरा चालू हालत में होने चाहिए।
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पासिंग के बाद बसें करवा ली जाती हैं संशोधित : राजीव प्रसाद
जिला परिवहन अधिकारी राजीव प्रसाद का कहना है कि कुछ मानकों के आधार पर जब बसों की पासिंग करते हैं तो उसके बाद चालक बसों को मोडिफाई (संशोधित) करवा लेते हैं। इस पर भी निरीक्षण कर कार्रवाई की जाती है लेकिन वाहन चालक और स्कूल संचालक भी ढील न बरतें तो उनके सहयोग से पॉलिसी लागू होने में आसानी होगी। उनका कहना है कि पॉलिसी का उल्लंघन करने पर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।



कार्रवाई की जिम्मेदारी आरटीए विभाग की : रोहतास
जिला शिक्षा अधिकारी रोहतास वर्मा का कहना है कि वे स्कूल व बसों को लेकर जानकारी उपलब्ध करवाने के साथ-साथ स्कूल संचालकों के साथ तालमेल भी करवा सकते हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जिम्मेदारी आरटीए विभाग की है।

कुरुक्षेत्र। राजीव प्रसाद।

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