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Kurukshetra News: वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर गरजे कर्मचारी

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कुरुक्षेत्र। मांगों के समर्थन में आशा वर्करों ने संयुक्त राज्य कर्मचारी संगठनों के आह्वान पर 24 घंटे के महापड़ाव में हिस्सा लेकर रोष व्यक्त किया और मांगों को लेकर संयुक्त राज्य कर्मचारी के बैनर तले उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा।
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जिला प्रधान ओम प्रकाश, जितेंद्र बंसल जिला प्रधान रिटायर्ड कर्मचारी संघ, रानी देवी जिला प्रधान सीटू, सुखबीर सिंह लालर जिला संयोजक किसान सभा, निशान सिंह राज्य वरिष्ठ उप प्रधान महासंघ, जरनैल सिंह राज्य सह सचिव की संयुक्त अध्यक्षता में उपायुक्त कार्यालय के बाहर महापड़ाव दोपहर दो बजे तक जारी रहा।
सर्व कर्मचारी संघ के प्रधान ओम प्रकाश ने बताया कि मुख्य मांगों में रेगुलराइजेशन की नीति बनवाने, पुरानी पेंशन बहाली, कौशल रोजगार निगम की समाप्ति, लाखों खाली पदों की भर्तियां, वेतन विसंगतियां ठीक करवाने, आरक्षित श्रेणियों का बैकलॉग पूरा करने, प्रदेश का अलग से वेतन आयोग गठित करने, निजीकरण बंद करने , मनरेगा में 200 दिन का काम और 600 रुपये प्रति दिन की मजदूरी होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त सभी बिजली के बिल वापिस हो, मणिपुर, मेवात सहित देश के अलग अलग हिस्सों में हो रही सांप्रदायिक और जातीय हिंसा पर रोक लगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को नहीं माना गया तो आंदोलन को ओर तेज किया जाएगा।
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महापड़ाव को सर्व कर्मचारी संघ के जिला सचिव संदीप नरवाल, रिटायर्ड कर्मचारी संघ के जिला सचिव फकीर चंद, महासंघ के जिला सचिव रणजीत सिंह महावीर सिंह दहिया, राज्य ऑडिटर रिटायर्ड कर्मचारी संघ, भीम सिंह सैनी अध्यक्ष सीटू, मान सिंह अध्यक्ष केयूके रिटायर्ड कर्मचारी संघ, आनंद सिंह ब्लॉक प्रधान एसकेएस, श्याम लाल यूनिट प्रधान बिजली बोर्ड, सुदेश कुमारी प्रवक्ता जन संघर्ष मंच, सुरेश गुढ़ा ब्लाक प्रधान लाडवा ने संबोधित किया। इस मौके पर रावल गुप्ता, रंजीत सिंह, अनिल कुमार, हरि सिंह, रामनाथ खामरा, बलवान सिंह, गुरु चरण सिंह, कृष्ण चौहान सहित अन्य मौजूद रहे।


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जारी रहा लिपिकों का धरना, की नारेबाजी
कुरुक्षेत्र। वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर लिपिकों का धरना वीरवार को भी जारी रहा, जिस दौरान उन्होंने जमकर नारेबाजी की। जिला सचिवालय में धरने के दौरान भूख हड़ताल भी जारी रखी तो वहीं चेतावनी दी कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी आंदोलन खत्म नहीं होगा।
कर्मचारी नेता सचिन सैनी ने कहा कि वे अपनी जायज मांग को लेकर आंदोलन करने पर मजबूर है। सरकार से कई दौर की वार्ता भी हुई, लेकिन सरकार इस जायज मांग को भी मामने को तैयार नहीं है, जिससे कर्मचारियों में रोष और अधिक गहराता जा रहा है। कर्मचारी किसी भी स्तर पर कमजोर पड़ने वाले नहीं है और जल्द मांग पूरी नहीं की तो वे अपना आंदोलन और भी तेज करने को मजबूर होंगे।
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